वाराणसी में शनि जयंती की भव्य तैयारी, काशी विश्वनाथ समेत 100 मंदिरों में विशेष अनुष्ठान
Varanasi : ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि 16 मई, शनिवार को शनि जयंती की श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। धर्मनगरी वाराणसी में इस अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर, काल भैरव मंदिर, मंगला गौरी मंदिर, संकटा देवी मंदिर और केदारेश्वर मंदिर सहित शहर के 100 से अधिक मंदिरों में विशेष पूजन, अभिषेक और अभिषेक किया जाएगा।
श्रद्धालु शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और कुंडली दोष से मुक्ति की कामना के साथ पूजा-अर्चना करेंगे। पिंगल संवत्सर के मंत्री माने जाने वाले Shani Dev की जयंती पर अभिजीत और गोधूलि मुहूर्त में विशेष पूजन का विधान बताया गया है।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडे ने बताया कि किराना दिनांक 16 मई को सुबह 5:11 बजे से प्रारंभ होकर 17 मई की रात 1:30 बजे तक रहेगी। इसलिए शनिदेव जयंती 16 मई को ही मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि शनिदेव न्याय के देवता माने जाते हैं और सच्चे मन से पूजा करने वालों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। काले तिल, सरसों का तेल, काला वस्त्र और शमी पत्र अर्पित करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्यदेव के कहने पर शनिदेव काशी आए थे और भगवान शिव की तपस्या कर वरदान प्राप्त किया था। इसके बाद उन्होंने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी।
पूजन के लिए अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:50 बजे से 12:45 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 7:04 बजे से 7:25 बजे तक रहेगा। पूजा सामग्री में सरसों का तेल, लोहे का दीपक, काले तिल, काली उड़द, नीले पुष्प, काला वस्त्र और शमी पत्र प्रमुख रहेंगे। बाकी "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें। वहीं शनि दोष से मुक्ति के लिए हनुमान चालीसा का पाठ भी विशेष फलदायी माना गया है।
ज्योतिषाचार्यों ने श्रद्धालुओं से सात्विक आहार अपनाने, पीपल के नीचे दीपदान करने और काले कौओं तथा कुत्तों को भोजन कराने की अपील की है।