वाराणसी में खुलेंगे 3 नए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, 600 सीटों से छात्राओं को मिलेगा लाभ
उत्तर प्रदेश सरकार ने वाराणसी के काशी विद्यापीठ, हरहुआ और बड़ागांव ब्लॉक में तीन नए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया है। 600 नई सीटें जुड़ने से जिले में कुल क्षमता 1700 हो जाएगी और गरीब बालिकाओं को निशुल्क आवासीय शिक्षा का लाभ मिलेगा।
वाराणसी: उत्तर प्रदेश सरकार ने महिला शिक्षा को बढ़ावा देने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसी क्रम में वाराणसी जिले के तीन विकास खंडों- काशी विद्यापीठ, बड़ागांव और हरहुआ में नए कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय (KGBV) स्थापित किए जाएंगे। इन विद्यालयों के शुरू होने से जिले में छात्राओं के लिए 600 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी और कुल क्षमता बढ़कर 1700 हो जाएगी।
प्रदेश के ऐसे विकास खंडों की पहचान की गई है, जहां अब तक कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित नहीं हैं। वर्ष 2026-27 में इन्हीं क्षेत्रों में कक्षा 6 से 12 तक के नए आवासीय विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। वाराणसी के काशी विद्यापीठ, बड़ागांव और हरहुआ ब्लॉक का चयन इसी आधार पर किया गया है।
भवनों की ड्राइंग और डिजाइन हुई फाइनल
शिक्षा विभाग की ओर से तीनों विद्यालयों के भवनों की ड्राइंग और डिजाइन को अंतिम रूप दे दिया गया है। अब जिला प्रशासन ने संबंधित विकास खंडों में प्रत्येक विद्यालय के लिए तीन-तीन एकड़ भूमि की तलाश तेज कर दी है, ताकि निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जा सके।
प्रत्येक विद्यालय में 200 छात्राओं के आवासीय अध्ययन की व्यवस्था होगी। इस प्रकार तीनों विद्यालयों में कुल 600 नई सीटें सृजित होंगी। यहां गरीब, वंचित और जरूरतमंद वर्ग की बालिकाओं को निशुल्क आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
वर्तमान में छह कस्तूरबा विद्यालय संचालित
वाराणसी में वर्तमान समय में कुल छह कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित हैं। ये विद्यालय आराजीलाइन, चिरईगांव, चोलापुर, पिंडरा, सेवापुरी और नगर क्षेत्र में स्थित हैं। इन विद्यालयों में हर वर्ष लगभग 1100 सीटों पर छात्राओं को प्रवेश दिया जाता है।
नए विद्यालयों के निर्माण और 600 अतिरिक्त सीटों के जुड़ने के बाद जिले में कुल सीटों की संख्या बढ़कर 1700 हो जाएगी, जिससे बड़ी संख्या में बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलेगा।
भूमि चयन के लिए तय किए गए सख्त मानक
बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि विद्यालयों के एकेडमिक ब्लॉक और छात्रावास निर्माण के लिए भूमि चयन करते समय निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन किया जाए।
निर्देशों के अनुसार चयनित भूमि पूरी तरह से निर्विवाद, सुगम पहुंच मार्ग वाली और निर्माण के लिए उपयुक्त होनी चाहिए। इसके अलावा भूमि के ऊपर से किसी प्रकार की हाईटेंशन विद्युत लाइन नहीं गुजरनी चाहिए। भूमि परिषदीय, राजकीय, डायट परिसर अथवा अन्य उपयुक्त सरकारी भूमि हो सकती है।
जल्द शुरू होगा निर्माण कार्य
जिला प्रशासन द्वारा भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण एजेंसी को कार्य सौंप दिया जाएगा। लक्ष्य है कि आगामी शैक्षणिक सत्र से पहले भवन निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाए, ताकि समय पर प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर छात्राओं को इसका लाभ दिया जा सके।
सहायक निदेशक बेसिक शिक्षा परिषद हेमंत राव ने बताया कि भूमि का चयन पूरा होते ही निर्माण एजेंसी को काम सौंप दिया जाएगा, जिससे निर्धारित समयसीमा के भीतर विद्यालय भवन तैयार कर लिए जाएं और नए सत्र में छात्राओं का प्रवेश सुनिश्चित किया जा सके।