{"vars":{"id": "130921:5012"}}

वाराणसी ड्रग वेयरहाउस के 3 सैंपल मिस्ब्रांड, सराकरी वितरण पर लगी रोक, BHU से पहली बार दवाओं की सैंपलिंग

 

वाराणसी। जिला ड्रग वेयरहाउस से लिए गए एजिथ्रोमाइसीन एंटीबायोटिक के सैंपलों की जांच में बड़ी अनियमितता सामने आई है। 3 सितंबर को वेयरहाउस से दवा के चार सैंपल लिए गए थे। जांच रिपोर्ट में इनमें से तीन सैंपल मिस्ब्रांड पाए गए हैं। यानी दवा के पैकेट और लेबल पर दी गई जरूरी जानकारी में गड़बड़ी मिली है। रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित दवा के वितरण पर तत्काल रोक लगा दी गई है और निर्माता कंपनी से जवाब मांगा गया है।

जिला खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने ड्रग वेयरहाउस से अलग-अलग आयु वर्ग के लिए निर्धारित एजिथ्रोमाइसीन के सैंपल लिए थे। जांच के दौरान चार में से तीन सैंपलों के लेबल में गंभीर खामियां मिलीं। रिपोर्ट के मुताबिक बैच नंबर, निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट और अन्य जरूरी विवरण में अंतर पाया गया।

तेलंगाना की कंपनी ने बनाई थी दवा

जांच में सामने आई एजिथ्रोमाइसीन दवा सनराइज इंटरनेशनल लैब लिमिटेड, तेलंगाना की बताई जा रही है। सैंपलों में लेबल संबंधी गड़बड़ी सामने आने के बाद अब दवा की सप्लाई और उसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मामले में संबंधित विभाग ने दवा का वितरण रोकते हुए कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है। अधिकारियों की कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई दवा मरीजों तक न पहुंचे।

यूपी में लखनऊ से हुई थी सप्लाई

बताया जा रहा है कि तेलंगाना की कंपनी से तैयार दवाओं की खरीद उत्तर प्रदेश के स्तर पर की गई थी। इसके बाद लखनऊ से अलग-अलग जिलों के ड्रग वेयरहाउस में एजिथ्रोमाइसीन की सप्लाई भेजी गई।
जिले में पहुंचने के बाद यह दवा सीएचसी, पीएचसी और जिला स्तरीय अस्पतालों में मरीजों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराई जा रही थी। ऐसे में सैंपलों में लेबल संबंधी गड़बड़ी सामने आने के बाद सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में दवा की गुणवत्ता और सप्लाई प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

हालांकि, जिला खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से समय रहते सैंपलिंग किए जाने और संबंधित दवा के वितरण पर रोक लगाए जाने से आगे की सप्लाई पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया गया है। अब कंपनी के जवाब और विभाग की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।