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काशी में 4 नई फ्लैटेड फैक्टरियां तैयार, एक छत तले 72 इकाइयां; जानिए क्या हैं खासियतें
 

 

वाराणसी। जिले में नए उद्योगों की स्थापना और सूक्ष्म तथा लघु उद्यमियों के लिए जमीन की कमी की समस्या अब जल्द ही समाप्त होने वाली है। जिला प्रशासन ने शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कुल चार फ्लैटेड फैक्टरी (बहुमंजिला औद्योगिक परिसर) स्थापित करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। 

बृहस्पतिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में हुई उद्योग बंधु की बैठक में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने यूपीसीडा (उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण) और उद्योग विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्रस्तावित स्थलों पर जमीन का सर्वेक्षण करें और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करें। 

वाराणसी के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र चांदपुर में दो फ्लैटेड फैक्टरियां प्रस्तावित हैं। यहां उद्योग विभाग के पास पहले से ही दो भूखंड उपलब्ध हैं। एक भूखंड का प्रस्ताव पहले ही शासन को भेजा जा चुका है, जबकि उसी क्षेत्र में बेकार पड़ी लगभग 3000 वर्ग मीटर जमीन के लिए नया प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। 

इसके अलावा, जिलाधिकारी ने यूपीसीडा को राजातालाब और पिंडरा क्षेत्रों में भी एक-एक फ्लैटेड फैक्टरी के निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि का सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया है। इन क्षेत्रों में फैक्टरियां बनने से स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को अपने गांव या शहर के नजदीक ही रोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे पलायन रुकेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। 

उद्योग विभाग के संयुक्त आयुक्त मोहन कुमार शर्मा ने बताया कि सभी फ्लैटेड फैक्टरियां *प्लग एंड प्ले* सिस्टम पर आधारित होंगी। सरकार उद्यमियों को पूरी तरह तैयार इकाई उपलब्ध कराएगी। प्रत्येक फैक्टरी में 6 मंजिलों पर कुल 72 इकाइयां विकसित की जाएंगी। यहां बनारसी साड़ी, अन्य कपड़े, लकड़ी के खिलौने, ऑर्गेनिक फूड प्रोसेसिंग समेत विभिन्न उत्पादों का निर्माण हो सकेगा। 

उद्यमियों को एक ही छत के नीचे सभी आवश्यक सुविधाएं मिलेंगी, जिनमें वाहन पार्किंग, लिफ्ट, बिजली, पानी, सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं शामिल हैं। 

फ्लैटेड फैक्टरी मॉडल उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जहां औद्योगिक भूमि की कमी है। यह बहुमंजिला इमारतों में छोटी-छोटी इकाइयों को जगह प्रदान करता है, जिससे साझा संसाधनों के कारण उद्यमियों की लागत काफी कम हो जाती है। 

जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बैठक में जोर दिया कि इस योजना से वाराणसी में एमएसएमई क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा। जल्द ही सर्वेक्षण और डीपीआर तैयार होने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।