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काशी के 7 संगीत साधकों को मिला UP संगीत नाटक अकादमी सम्मान, बनारस की कला-साधना को मिला गौरव
 

 

वाराणसी। काशी की समृद्ध संगीत और सांस्कृतिक परंपरा को शुक्रवार को एक और गौरवपूर्ण पहचान मिली, जब उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से शहर के सात प्रतिष्ठित कलाकारों को सम्मानित किया गया। लखनऊ में आयोजित समारोह में उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने इन कलाकारों को सम्मान प्रदान किया। सम्मान पाने वालों में बीएचयू के दो संगीत प्रोफेसर और दो पूर्व छात्र भी शामिल हैं।

पुरस्कार प्राप्त करने वालों में दुक्कड़ वादन के लिए प्रसिद्ध खांटी बनारसी कलाकार मंगल प्रसाद, मशहूर शहनाई वादक जवाहर लाल, संगीत लेखक एवं नृत्य-रंगमंच कर्मी विजय शंकर मिश्रा, शास्त्रीय गायक एवं बीएचयू के गायन विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश शाह, प्रो. राम शंकर मिश्रा, भरतनाट्यम नृत्यांगना माला होंबल तथा वायलिन वादक सुखदेव मिश्रा शामिल हैं।

वायलिन मन की भावनाओं को स्वर देता है : सुखदेव मिश्रा

सम्मान प्राप्त करने के बाद वायलिन वादक सुखदेव मिश्रा ने कहा कि वायलिन ऐसा वाद्य यंत्र है जो व्यक्ति के भीतर की हर भावना को अभिव्यक्त करने की क्षमता रखता है। उन्होंने बताया कि उनके घर में सारंगी और तबले की परंपरा थी, लेकिन पिता चाहते थे कि वे कोई अलग वाद्य यंत्र सीखें। प्रारंभिक संगीत शिक्षा उन्हें अपने ताऊ पंडित नारायण दास मिश्र और बड़े भाई सोमनाथ मिश्र से मिली। उन्होंने काशी विद्यापीठ से पीजी तथा बीएचयू और चंडीगढ़ से संगीत में उच्च शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड में करियर बनाने के बजाय उन्होंने शास्त्रीय संगीत को अपनी पहचान बनाया, हालांकि रविंद्र जैन और अनुराधा पौडवाल जैसे कलाकारों के साथ वायलिन वादन का अवसर मिला।

पति की स्मृति को समर्पित किया सम्मान : माला होंबल

भरतनाट्यम नृत्यांगना माला होंबल ने अपना सम्मान अपने दिवंगत पति प्रो. पी.सी. होंबल को समर्पित किया। उन्होंने बताया कि उनके पति बीएचयू के नृत्य विभाग के अध्यक्ष रहे थे और उन्हें वर्ष 2000 में उत्तर प्रदेश तथा 2021 में राष्ट्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका था। पिछले वर्ष उनके निधन के बाद अब वह अपनी बेटी के साथ लंका क्षेत्र में रहती हैं। उनकी बड़ी बेटी भी इस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रही है। माला होंबल ने भरतनाट्यम का प्रशिक्षण शंकर होंबल और गिरिजा देवी होंबल से प्राप्त किया तथा वर्तमान में कोरियोग्राफर के रूप में अपनी कला यात्रा जारी रखे हुए हैं।

काशी के इन सात कलाकारों को मिला यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि बनारस की समृद्ध संगीत एवं सांस्कृतिक परंपरा का भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है।