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जन्मतिथि बदलने के नाम पर 40 हजार की घूस? छात्र की शिकायत से मचा हड़कंप, जानिए क्या है पूरा मामला

UP बोर्ड वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय में जन्मतिथि संशोधन के नाम पर 40 हजार रुपये रिश्वत लेने का मामला सामने आया है। छात्र की शिकायत के बाद विभाग में हड़कंप मच गया। कई अधिकारियों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। मामले में दस्तावेजों और हस्ताक्षरों में भी गंभीर गड़बड़ियां मिली हैं।

 

वाराणसी: यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में जन्मतिथि संशोधन के नाम पर कथित रिश्वतखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि एक छात्र से मार्कशीट में जन्मतिथि बदलने के बदले 40 हजार रुपये लिए गए। मामले का खुलासा तब हुआ जब छात्र को एक ही दिन में संशोधित मार्कशीट मिलने पर शक हुआ और उसने सीधे प्रयागराज स्थित यूपी बोर्ड मुख्यालय में शिकायत दर्ज करा दी। अब इस पूरे मामले में क्षेत्रीय कार्यालय के कई अधिकारियों और कर्मचारियों से जवाब तलब किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

गोरखपुर निवासी अंकित कुमार ने आरोप लगाया है कि उसने अपनी हाईस्कूल मार्कशीट में जन्मतिथि संशोधन के लिए वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय में आवेदन किया था।

अंकित ने बताया कि वह वर्तमान में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) का छात्र है और उसने वर्ष 2014 में नीना थापा इंटर कॉलेज, गोरखपुर से हाईस्कूल पास किया था। उसके अनुसार, जन्मतिथि में संशोधन कराने के लिए वह कई बार कार्यालय का चक्कर लगाता रहा।

40 हजार दो, काम हो जाएगा

अंकित का आरोप है कि एक दिन कार्यालय में बाबू राहुल चौरसिया ने उससे कहा कि यह काम प्रयागराज और दिल्ली तक से जुड़ा है, इसलिए 40 हजार रुपये खर्च होंगे।

छात्र के मुताबिक, उसने मजबूरी में पैसे दे दिए और अगले ही दिन संशोधित मार्कशीट उसे सौंप दी गई। इतनी जल्दी काम होने पर छात्र को शक हुआ कि कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ। इसके बाद उसने यूपी बोर्ड सचिव को शिकायत भेज दी।

नियम क्या कहते हैं?

यूपी बोर्ड के नियमों के अनुसार, क्षेत्रीय कार्यालय केवल तीन साल के भीतर जन्मतिथि समेत अन्य संशोधन कर सकते हैं। तीन साल से अधिक पुराने मामलों में संशोधन का अधिकार केवल प्रयागराज स्थित मुख्यालय में बोर्ड सचिव के पास होता है। ऐसे में 2014 के मामले में वाराणसी कार्यालय द्वारा सीधे संशोधन किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।

कई अधिकारियों से मांगा गया जवाब

मामले की गंभीरता को देखते हुए वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय के प्रभारी अपर सचिव दिनेश सिंह ने कई अधिकारियों और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। इनमें उप सचिव साहब सिंह यादव, सहायक सचिव मनोज कुमार, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी राणा प्रताप सिंह, प्रशासनिक अधिकारी संजय कुमार जायसवाल, प्रधान सहायक कन्हैया लाल और वरिष्ठ सहायक राहुल चौरसिया के नाम शामिल हैं।

दस्तावेजों और हस्ताक्षरों में भी गड़बड़ी

प्रारंभिक जांच में कई गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। छात्र द्वारा प्रस्तुत स्थानांतरण प्रमाण-पत्र और अन्य दस्तावेजों में विरोधाभास होने के बावजूद फाइल आगे बढ़ा दी गई। जांच में यह भी पाया गया कि पत्रावली में जांच समिति की रिपोर्ट मौजूद नहीं थी, जबकि आदेश उसी रिपोर्ट के आधार पर पारित होने का उल्लेख किया गया। इसके अलावा कई जगह ओवरराइटिंग, अलग-अलग जन्मतिथियां और हस्ताक्षरों को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं।

मानवीय त्रुटि के आधार पर संशोधन?

पत्रावली में दर्ज टिप्पणियों के अनुसार, कुछ अधिकारियों ने “मानवीय त्रुटि” का हवाला देकर जन्मतिथि संशोधन को उचित बताया था। हालांकि जांच में यह सामने आया कि कई आदेशों और रिकॉर्ड में अलग-अलग जानकारियां दर्ज थीं, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है।

जवाब नहीं मिला तो होगी कार्रवाई

कार्यालय की ओर से जारी नोटिस में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को तय समय सीमा के भीतर लिखित जवाब और साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। स्पष्ट कहा गया है कि समय पर जवाब नहीं मिलने पर विभागीय नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।