16 साल बाद न्याय: आंदोलन से जुड़े सात कांग्रेस कार्यकर्ता बरी, अदालत के फैसले को बताया ‘सत्य की जीत’
वाराणसी। वर्ष 2010-11 के आंदोलन से जुड़े एक पुराने मामले में 16 वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सात कांग्रेस कार्यकर्ताओं को दोषमुक्त कर दिया। 30 मार्च 2026 को आए इस निर्णय को सत्य और न्याय की जीत के रूप में देखा जा रहा है।
मामला उस समय का है जब नगर निगम परिसर में तत्कालीन सरकार की नीतियों के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लोकतांत्रिक आंदोलन किया था। इस दौरान प्रशासन ने राघवेंद्र चौबे, अरविंद किशोर राय समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
इस मामले में राघवेंद्र चौबे, अरविंद किशोर राय, राजेंद्र मिश्रा, घनश्याम सिंह, पुन्नूलाल बिंद, गुलाम हैदर और प्रमोद सोनकर सहित अन्य पर आरोप लगाए गए थे। न्यायालय ने सभी पक्षों के तर्क, साक्ष्य और परिस्थितियों की गहन समीक्षा के बाद सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
फैसले के बाद महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता कभी डरने वाले नहीं हैं और वे हमेशा जनहित में संघर्ष करते रहेंगे। उन्होंने कहा, “ईश्वर के घर देर है, अंधेर नहीं” और यह फैसला उसी का उदाहरण है।
उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि वर्षों के संघर्ष के बाद सच्चाई की जीत हुई है। साथ ही, उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर सिंह और उनकी टीम का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने पूरी निष्ठा से इस मामले की पैरवी की।