झांसी के बाद अब काशी में भी नया नियम, नकाब पहनकर सर्राफा दुकानों में एंट्री पर रोक
वाराणसी में सर्राफा कारोबारियों ने सुरक्षा को लेकर एक अहम फैसला लिया है। झांसी के बाद अब काशी में भी बुर्का, हिजाब, घूंघट, हेलमेट या मास्क पहनकर आने वाले ग्राहकों को गहने नहीं बेचे जाएंगे। यदि किसी को गहने देखना या खरीदना है, तो दुकान में प्रवेश से पहले चेहरे से नकाब हटाना अनिवार्य होगा। इसे लेकर सर्राफा बाजारों में दुकानों के बाहर पोस्टर लगाए गए हैं, जिन पर साफ लिखा है, “मास्क, बुर्का, हेलमेट और नकाब पहनकर दुकान में आना मना है।
उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ की वाराणसी इकाई के जिलाध्यक्ष कमल सिंह ने बताया कि यह फैसला व्यापारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने कहा, “चेहरा ढककर आने वाले लोगों को हम कोई सामान नहीं बेचेंगे। अगर किसी वारदात की स्थिति बनती है तो पहचान करना मुश्किल हो जाता है। हमारी बस यही मांग है कि चाहे कोई भी पहनावा हो, दुकान में आने पर चेहरा दिखाया जाए, ताकि हमें संतुष्टि हो सके।”
सर्राफा बाजारों में लगाए जा रहे पम्फलेट
पूर्वांचल के प्रमुख सर्राफा बाजारों- रेशम कटरा, ठठेरी बाजार, सुड़िया, गोविंदपुरा, छत्तातला और कर्णघंटा में व्यापारियों से बातचीत की। इस दौरान उत्तर प्रदेश स्वर्णकार संघ के अध्यक्ष, महामंत्री और अन्य पदाधिकारी खुद दुकानों पर पम्फलेट लगाते नजर आए। जिलाध्यक्ष कमल सिंह व्यापारियों से इस नियम को सख्ती से लागू करने की अपील कर रहे थे।
कमल सिंह ने बताया कि सर्राफा व्यवसाय में कीमती सामान होता है और अक्सर लूट, चोरी व छिनैती की घटनाओं में आरोपी चेहरा ढककर आते हैं। ऐसे में संघ ने सर्वसम्मति से तय किया है कि हेलमेट, मास्क या मुंह बांधकर आने वालों को न तो दुकान में प्रवेश मिलेगा और न ही सामान बेचा जाएगा।
मुस्लिम बहुल इलाकों में भी लागू होगा नियम
स्वर्णकार संघ के अनुसार यह व्यवस्था मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी समान रूप से लागू रहेगी। कमल सिंह ने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा, “कोई भी अपने पहनावे में आए—बुर्का हो या हिजाब—लेकिन दुकान के अंदर आते समय चेहरा खोलना जरूरी होगा, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।”
संघ के जिला महामंत्री किशोर सेठ ने बताया कि बीते दो वर्षों में सोने-चांदी के दामों में भारी बढ़ोतरी हुई है। निवेश के तौर पर भी लोगों का रुझान बढ़ा है। इसी बीच कई दुकानों पर ऐसे मामले सामने आए, जहां बुर्का, हिजाब या घूंघट में आई महिलाओं द्वारा चोरी और लूट की घटनाएं की गईं, जिनकी पहचान करना मुश्किल हो गया।
सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि पुलिस प्रशासन का उन्हें पूरा सहयोग मिलता है, लेकिन अपनी और ग्राहकों की सुरक्षा के लिए यह कदम जरूरी हो गया था। अब काशी के सर्राफा बाजारों में यह नियम सख्ती से लागू किया जाएगा।