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वाराणसी के नेहिया में बवाल के बाद पुलिस का एक्शन, 11 नामजद समेत 60 पर FIR दर्ज

 
वाराणसी। चोलापुर थाना क्षेत्र के नेहिया गांव में झंडा और पोस्टर को लेकर शुरू हुआ विवाद शुक्रवार को हिंसक रूप ले बैठा। अंबेडकर जयंती के बाद झंडा हटाने और लगाने को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए, जिससे हालात बेकाबू हो गए।

प्रदर्शन कर रहे दलित समाज के लोगों ने बाबतपुर-चौबेपुर मार्ग पर जाम लगा दिया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की। इसी दौरान उग्र भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया।

इस पथराव में विदुष सक्सेना (एसीपी सारनाथ) गंभीर रूप से घायल हो गए, उनके सिर में चोट आई। इसके अलावा चोलापुर थाने के दो दरोगा भी जख्मी हो गए। सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

मामले की शुरुआत गांव के मुख्य द्वार पर झंडा लगाने को लेकर हुई। जानकारी के मुताबिक, रामनवमी के दिन यहां भगवा झंडा लगाया गया था। इसके बाद अंबेडकर जयंती पर भीम आर्मी और बसपा समर्थकों ने भगवा झंडा हटाकर नीला झंडा लगा दिया।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों झंडे हटवा दिए थे, लेकिन शुक्रवार को फिर से भगवा झंडा लगाए जाने पर विवाद भड़क गया। इसे लेकर एक पक्ष ने विरोध शुरू कर दिया, जो धीरे-धीरे उग्र प्रदर्शन में बदल गया।

बढ़ते तनाव के बीच भारी फोर्स तैनात

घटना की सूचना मिलते ही चोलापुर, चौबेपुर, फूलपुर और बड़ागांव समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। साथ ही पीएसी और आरआरएफ की टीमें भी तैनात कर दी गईं, ताकि हालात को काबू में रखा जा सके।

पुलिस ने जब भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की, तो गांव के अंदर की ओर से अचानक पथराव शुरू हो गया। हालात बिगड़ते देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर किया गया।

60 लोगों पर केस, कई हिरासत में

पुलिस ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए 11 नामजद और करीब 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आरोपियों पर हत्या के प्रयास, दंगा, सरकारी कार्य में बाधा समेत 12 गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।

फिलहाल पुलिस ने 6 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। गांव में अभी भी तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।