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शिक्षामित्रों के हक में इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, वाराणसी BSA को 6 हफ्ते में फैसला लेने का निर्देश
 

 

प्रयागराज/वाराणसी। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षामित्रों के हित में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा और अहम निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने वाराणसी में कार्यरत एक मृतक शिक्षामित्र की पत्नी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) वाराणसी को आदेश दिया है कि वह नियमानुसार याची की बात सुनकर छह सप्ताह के भीतर सकारण आदेश पारित करें।

यह आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने वाराणसी निवासी शहनाज बेगम की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। याची की ओर से अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने पक्ष रखा। कोर्ट ने मामले का निस्तारण करते हुए शहनाज बेगम को निर्देश दिया कि वह तीन सप्ताह के भीतर विभाग के समक्ष नया प्रत्यावेदन प्रस्तुत करें। इसके बाद बीएसए वाराणसी को छह सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लेना होगा।

क्या है पूरा मामला?

मामला वाराणसी के एक प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षामित्र से जुड़ा है, जिनकी 48 वर्ष की आयु में असामयिक मृत्यु हो गई थी। पति की मौत के बाद उनकी पत्नी शहनाज बेगम ने पारिवारिक पेंशन और ग्रेच्युटी के भुगतान के लिए बेसिक शिक्षा विभाग से गुहार लगाई थी।

आरोप है कि लंबे समय तक बीएसए कार्यालय की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिसके बाद पीड़िता ने न्याय के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट में उठाया गया शिक्षामित्रों की सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा

याची के अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने कोर्ट में शिक्षामित्रों की स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि प्रदेश में करीब 1 लाख 70 हजार शिक्षामित्र कार्यरत हैं। पहले उन्हें मात्र 10 हजार रुपये मानदेय मिलता था, जिसे बाद में बढ़ाकर 18 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया।

उन्होंने अदालत को बताया कि कई शिक्षामित्र पिछले 25 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे हैं, लेकिन सेवानिवृत्ति या मृत्यु के बाद उनके परिवार को न तो पेंशन मिलती है और न ही ग्रेच्युटी जैसी सामाजिक सुरक्षा।

अधिवक्ता ने ‘ग्रेच्युटी ऑफ पेमेंट एक्ट’ और कर्मचारी भविष्य निधि कानून का हवाला देते हुए कहा कि ये कानून शैक्षणिक संस्थानों पर भी लागू होते हैं। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 39, 42, 43 और 47 के तहत संविदाकर्मियों और दैनिक वेतनभोगियों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

छह सप्ताह में देना होगा स्पष्ट फैसला

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब वाराणसी के बेसिक शिक्षा विभाग को इस मामले में स्पष्ट और लिखित निर्णय लेना होगा। माना जा रहा है कि यह आदेश प्रदेश के हजारों शिक्षामित्रों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, जो लंबे समय से सामाजिक सुरक्षा और पेंशन संबंधी लाभों की मांग कर रहे हैं।