करपात्र सम्मान की घोषणा, 14 अगस्त को पं. गायत्री प्रसाद पाण्डेय और डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र करपात्र गौरव से होंगे सम्मानित
वाराणसी। धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के 119वें प्राकट्य दिवस के अवसर पर श्रीधर्मसंघ शिक्षा मण्डल ने प्रतिष्ठित करपात्र रत्न और करपात्र गौरव सम्मान की घोषणा कर दी है। यह सम्मान 14 अगस्त को दुर्गाकुंड स्थित श्रीधर्मसंघ परिसर में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किए जाएंगे।
धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज की अध्यक्षता में हुई चयन समिति की बैठक में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक और व्याकरण के विद्वान आचार्य पं. गायत्री प्रसाद पाण्डेय को करपात्र रत्न सम्मान के लिए चुना गया। वहीं, करपात्र चिंतन के विद्वान और स्वामी करपात्री जी के कृपापात्र शिष्य डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र को करपात्र गौरव सम्मान देने का निर्णय लिया गया।
धर्मसंघ के महामंत्री पं. जगजीतन पाण्डेय ने बताया कि यह सम्मान प्रतिवर्ष करपात्र चिंतन और भारतीय सनातन परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्वानों को प्रदान किया जाता है।
उन्होंने बताया कि पं. गायत्री प्रसाद पाण्डेय ने 'करपात्र चरितामृतम्' जैसी महत्वपूर्ण पुस्तक की रचना की है। इसके अलावा उनके द्वारा किया गया श्रीमद्भागवत का पद्यानुवाद भी विद्वत समाज में काफी चर्चित है। उन्होंने दर्जनभर से अधिक पुस्तकों का लेखन और संपादन किया है। उन्हें सम्मान स्वरूप 1.25 लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र और श्रीफल प्रदान किया जाएगा।
वहीं डॉ. श्रीप्रकाश मिश्र लंबे समय तक स्वामी करपात्री जी महाराज के लेखन सचिव रहे हैं। वे हरिश्चंद्र डिग्री कॉलेज में रीडर पद से सेवानिवृत्त हुए और करपात्र दर्शन एवं चिंतन के प्रमुख विद्वानों में उनकी पहचान रही है। उन्हें 51 हजार रुपये, प्रशस्ति पत्र और श्रीफल देकर सम्मानित किया जाएगा।
श्रीधर्मसंघ की ओर से आयोजित यह समारोह हर वर्ष की तरह इस बार भी धर्म, दर्शन और भारतीय संस्कृति से जुड़े विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न होगा।