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धागे की बढ़ती कीमतों का असर : महंगी होगी बनारसी साड़ी, सूट और दुपट्टे, 10 सितंबर से बढ़ेंगे दाम

 

वाराणसी। दशहरा, दीपावली और आगामी त्योहारों में अगर आप बनारसी साड़ी या पारंपरिक वस्त्र खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो आपकी जेब पर थोड़ा अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। वाराणसी के प्रमुख बुनकर संगठनों और व्यापारियों ने बनारसी साड़ी, सूट फैब्रिक, दुपट्टा और थान समेत तैयार वस्त्रों की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। नई दरें 10 सितंबर से लागू होंगी।

बुनकर संगठनों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमत बढ़ने और वैश्विक राजनीतिक तनाव के कारण वस्त्र निर्माण की लागत लगातार बढ़ी है। खासतौर पर पेट्रोकेमिकल और सिंथेटिक कच्चे माल से जुड़े धागों की कीमतों में पिछले कुछ महीनों में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है।

पांच महीने में धागे के दाम में बड़ा उछाल

वाराणसी वस्त्र बुनकर संघ के उपाध्यक्ष शैलेश सिंह के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोकेमिकल और सिंथेटिक कच्चे माल की कीमतों पर पड़ा है। बनारसी वस्त्रों में इस्तेमाल होने वाले पेट्रो आधारित कच्चे माल की कीमत पिछले पांच महीनों में करीब 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ी है।

उन्होंने बताया कि करीब पांच महीने पहले जो धागा 200 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मिल रहा था, उसकी कीमत अब बढ़कर 260 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इसी तरह 120 रुपये प्रति किलोग्राम वाला एक अन्य धागा अब करीब 175 रुपये प्रति किलोग्राम में बिक रहा है।

बुनकरों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है। ऐसे में तैयार वस्त्रों की कीमतों में संशोधन करना जरूरी हो गया है।

कई संगठनों की सहमति से बढ़ेंगी कीमतें

कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर बुनकर उद्योग मंडल, बुनकर बिरादराना तंजीम, हिंदू बुनकर कल्याण समिति, स्थानीय 'गिरस्ता' और व्यापारियों ने बैठक की। बैठक में सभी पक्षों ने उत्पादन लागत को देखते हुए 10 सितंबर से संशोधित दरें लागू करने पर सहमति जताई।

इस फैसले का असर बनारसी साड़ी के साथ-साथ सूट फैब्रिक, दुपट्टा, थान और अन्य तैयार वस्त्रों पर भी देखने को मिलेगा। त्योहारों के सीजन में मांग बढ़ने के बीच कीमतों में यह बढ़ोतरी ग्राहकों के बजट को प्रभावित कर सकती है।

यूपी टेक्स-2026 में दिखेगी काशी के वस्त्र उद्योग की पहचान

इसी बीच वाराणसी का वस्त्र उद्योग अपनी पारंपरिक विरासत और आधुनिक क्षमता को बड़े मंच पर पेश करने की तैयारी में है। उत्तर प्रदेश को वैश्विक वस्त्र केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में 8 और 9 सितंबर को 'यूपी टेक्स-2026' का आयोजन किया जा रहा है।

इस प्रदर्शनी में वाराणसी के करीब 50 कारोबारी हिस्सा ले रहे हैं। यहां बनारसी साड़ी तैयार करने की प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन भी किया जाएगा। इसके अलावा रेडीमेड कपड़ों के निर्माण की प्रक्रिया भी लोगों को दिखाई जाएगी।

रेडीमेड गारमेंट कारोबारी राजेश जायसवाल के मुताबिक, इस तरह के आयोजन स्थानीय कारोबारियों को अपने उत्पाद बड़े बाजार तक पहुंचाने और नए खरीदारों, सप्लायर्स तथा कारोबारी साझेदारों से सीधे जुड़ने का अवसर देते हैं।

लाइव डेमो देने वाले बुनकर गौरव मौर्या ने कहा कि बनारसी साड़ी काशी की सदियों पुरानी कला और पहचान है। ऐसे आयोजनों के जरिए इस विरासत को देश और दुनिया के सामने नए तरीके से पेश करने का अवसर मिलता है।

उद्योग विभाग की उपायुक्त उद्योग (प्रवर्तन), हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग कुसुम के अनुसार, वाराणसी में पारंपरिक वस्त्रों के साथ-साथ रेडीमेड गारमेंट क्षेत्र में भी काफी संभावनाएं हैं। ऐसे मंचों से कारोबारियों को नए बाजारों और खरीदारों से जोड़ने में मदद मिलेगी, जिससे वाराणसी के गारमेंट उद्योग को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार मिल सकता है।