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वाराणसी के 750+ स्कूलों में बनेंगे 'भागवत गीता क्लब', Gen Z को तनावमुक्त जीवन और नैतिक मूल्यों की मिलेगी सीख
 

 

वाराणसी। काशी में स्कूली शिक्षा के साथ आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों को जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू होने जा रही है। जिला प्रशासन और कर्मयोगी पीठ के संयुक्त प्रयास से वाराणसी के 750 से अधिक स्कूलों में 'भागवत गीता क्लब' स्थापित किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी, विशेषकर Gen Z, को श्रीमद्भगवद्गीता के जीवनोपयोगी संदेशों से जोड़ते हुए उन्हें तनावमुक्त जीवन, सकारात्मक सोच और नैतिक मूल्यों की ओर प्रेरित करना है।

सभी वर्गों के विद्यार्थियों तक पहुंचेगा गीता का संदेश

इस अभियान की खास बात यह है कि इसे केवल पारंपरिक विद्यालयों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। योजना के तहत सरकारी, निजी, मिशनरी स्कूलों के साथ-साथ मदरसों के विद्यार्थियों को भी गीता के सार्वभौमिक संदेशों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। पहल का उद्देश्य धार्मिक शिक्षा देना नहीं, बल्कि गीता में निहित जीवन प्रबंधन, कर्तव्यबोध, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों को विद्यार्थियों तक पहुंचाना है।

तनावमुक्ति और चरित्र निर्माण पर रहेगा फोकस

कर्मयोगी पीठ के अध्यक्ष गौरव मिश्र के अनुसार, आज की युवा पीढ़ी पढ़ाई, करियर और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दबाव से जूझ रही है। ऐसे समय में गीता के सिद्धांत विद्यार्थियों को तनाव से बाहर निकलने, सही निर्णय लेने, कर्मयोग की भावना विकसित करने और जीवन में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देंगे। गीता क्लबों के माध्यम से नियमित संवाद, प्रेरक सत्र और विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, ताकि छात्र जीवन की चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकें।

काशी को बनाया जाएगा 'भागवत गीता मॉडल सिटी'

इस अभियान के जरिए वाराणसी को 'भागवत गीता मॉडल सिटी' के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि यह पहल सफल रहती है तो इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे उत्तर प्रदेश में लागू करने की योजना है। कर्मयोगी पीठ का मानना है कि गीता के विचार युवाओं में अनुशासन, सामाजिक समरसता, राष्ट्र निर्माण की भावना और सकारात्मक नेतृत्व क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

शिक्षा और संस्कार का नया मॉडल

काशी से शुरू हो रही यह पहल शिक्षा और संस्कारों के समन्वय का एक नया मॉडल बन सकती है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जीवन मूल्यों पर आधारित यह प्रयोग विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और समाज पर कितना व्यापक प्रभाव छोड़ता है।