30 दिनों में क्राइम कंट्रोल पर नहीं दिखा कोई काम, भेलूपुर और लोहता थाना प्रभारी लाइन हाजिर
वाराणसी में अपराध नियंत्रण में लापरवाही पर पुलिस आयुक्त ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भेलूपुर और लोहता थाना प्रभारियों को लाइन हाजिर कर दिया। समीक्षा बैठक में कामकाज संतोषजनक न मिलने पर यह कदम उठाया गया। कई थानों में नई तैनाती की गई और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
वाराणसी: शहर में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। काम में लापरवाही और अपराध पर प्रभावी नियंत्रण न कर पाने के कारण भेलूपुर थाना प्रभारी सुधीर कुमार त्रिपाठी और लोहता थाना प्रभारी राजबहादुर मौर्य को लाइन हाजिर कर दिया गया है।
हाल ही में भेलूपुर क्षेत्र में 10 लाख रुपये की डकैती की घटना सामने आई थी। बीते तीन वर्षों में इस क्षेत्र में डकैती के दो बड़े मामले दर्ज हो चुके हैं। इसके अलावा अस्सी घाट क्षेत्र में लगातार हो रही मारपीट और दुर्व्यवहार की घटनाओं पर नियंत्रण नहीं होने को भी गंभीरता से लिया गया।
समीक्षा में खुली लापरवाही
शनिवार को पुलिस लाइन में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान यह सामने आया कि दोनों थाना प्रभारियों ने पिछले 30 दिनों में अपराध नियंत्रण और अन्य जिम्मेदारियों के निर्वहन में संतोषजनक कार्य नहीं किया। इसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों को हटाया गया।
कई थानों में नई तैनाती
कार्रवाई के साथ ही कई थानों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। कपसेठी थाना प्रभारी सधुवन राम गौतम को चोलापुर थाना भेजा गया है। पुलिस लाइन में तैनात दुर्गा सिंह को भेलूपुर थाना प्रभारी बनाया गया है। वहीं, उपनिरीक्षक दिगंबर उपाध्याय को लोहता और विकास कुमार मौर्य को कपसेठी थाना प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।
काम नहीं तो कुर्सी नहीं
पुलिस आयुक्त ने साफ कहा कि वही थानेदार बनेगा जो काम करेगा। अपराध पर सख्त नियंत्रण, महिला अपराध के प्रति शून्य सहनशीलता और बेहतर यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सामान्य मामलों की जांच 30 दिन और गंभीर मामलों की 45 दिन के भीतर पूरी कर आरोप पत्र दाखिल किया जाए।
अपराधियों पर सख्ती के निर्देश
पुलिस आयुक्त ने गोतस्करी, चोरी, नकबजनी, धोखाधड़ी, मादक पदार्थ और साइबर अपराध से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण और प्रभावी पुलिसिंग पर जोर दिया गया। सैनिक सम्मेलन में पुलिसकर्मियों की लंबित समस्याओं, आवास, पेंशन और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को समयबद्ध तरीके से हल करने के निर्देश दिए गए।