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BHU फायरिंग कांड: जांच के लिए गठित हुई हाई-लेवल कमेटी, दोषी छात्र होंगे निष्कासित 

बीएचयू परिसर में शनिवार रात हुई फायरिंग के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। पल्सर सवार हमलावर फरार हैं और पांच संदिग्ध छात्रों के नाम सामने आए हैं। परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, CCTV और पैनिक बटन सक्रिय किए गए हैं।

 

वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर में शनिवार रात हुई फायरिंग की घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। पूरे मामले की गहन जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि घटना में शामिल किसी भी छात्र को बख्शा नहीं जाएगा और दोषी पाए जाने पर तत्काल निष्कासन (डिबार) की कार्रवाई होगी।

डालमिया हॉस्टल की ओर से आए हमलावर, फायरिंग कर भागे

विश्वविद्यालय अधिकारियों के अनुसार शनिवार रात करीब 9:15 बजे डालमिया हॉस्टल की ओर से पल्सर बाइक पर सवार हमलावर आए और फायरिंग की घटना को अंजाम दिया। घटना को अंजाम देने के बाद हमलावर उसी दिशा में वापस भाग निकले।
चीफ प्रॉक्टर कार्यालय को रात 9:20 बजे घटना की सूचना मिली, जिसके बाद तत्काल पूरे परिसर की घेराबंदी कर सभी प्रवेश और निकास द्वार बंद करने के निर्देश दिए गए। हालांकि अंधेरा और अफरा-तफरी के कारण बाइक का नंबर स्पष्ट रूप से नहीं देखा जा सका।

पांच संदिग्ध छात्रों के नाम सामने, FIR की तैयारी

प्रारंभिक जांच में पांच संदिग्ध छात्रों के नाम सामने आए हैं। पुलिस उनकी भूमिका की जांच कर रही है और जल्द ही इस मामले में एफआईआर दर्ज की जाएगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने साफ किया है कि यदि कोई छात्र इस घटना में शामिल पाया गया तो उसे तुरंत विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया जाएगा।

आपसी रंजिश का एंगल भी जांच के दायरे में

गठित जांच समिति इस पहलू की भी जांच करेगी कि क्या फायरिंग की घटना किसी आपसी रंजिश का परिणाम है। यदि ऐसा पाया जाता है, तो भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए संवाद और अन्य उपायों पर विचार किया जाएगा।

संवेदनशील इलाकों में बढ़ाई गई सुरक्षा

घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। बिड़ला ‘अ’ हॉस्टल लेन और धन्वंतरि गेट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
पूरे इलाके को सीसीटीवी निगरानी में लाया जा रहा है ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ‘पैनिक बटन’ तकनीक को भी सक्रिय कर दिया गया है।
प्राक्टोरियल बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रहे हैं और जल्द ही आरोपितों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।