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BHU में पूर्व महिला खिलाड़ी का बड़ा आरोप: सुरक्षाधिकारी समेत 7 पर यौन उत्पीड़न का केस, CJM कोर्ट ने जारी किया नोटिस

वाराणसी के बीएचयू में एक पूर्व महिला खिलाड़ी ने प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सुरक्षाधिकारी समेत सात लोगों पर यौन उत्पीड़न, मारपीट और कपड़े बदलते समय वीडियो बनाने का आरोप लगाया है। CJM कोर्ट ने शिकायत स्वीकार कर 8 जुलाई को सुनवाई तय की और एक सुरक्षाधिकारी को नोटिस जारी किया है।

 

वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। विश्वविद्यालय की एक पूर्व महिला खिलाड़ी ने प्रॉक्टोरियल बोर्ड के एक सुरक्षाधिकारी समेत सात लोगों के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में यौन उत्पीड़न, मारपीट, अवैध रूप से बंधक बनाने और कपड़े बदलते समय वीडियो रिकॉर्ड करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने मामले को संज्ञान में लेते हुए 8 जुलाई को सुनवाई की तिथि तय की है और एक सुरक्षाधिकारी को नोटिस जारी किया है।

सुरक्षाधिकारी और महिला सुरक्षाकर्मियों पर गंभीर आरोप

कोर्ट में दायर शिकायत के अनुसार, प्रॉक्टोरियल बोर्ड के एक सुरक्षाधिकारी, चार महिला सुरक्षाकर्मियों सहित कुल सात लोगों को आरोपी बनाया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि विश्वविद्यालय परिसर में उनके साथ लगातार उत्पीड़न किया गया और उन्हें मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कपड़े बदलते समय उनका वीडियो बनाया गया, जो उनकी निजता का गंभीर उल्लंघन है। साथ ही यौन उत्पीड़न और अभद्र व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

12 घंटे तक बंधक बनाने और धमकाने का दावा

पूर्व महिला खिलाड़ी ने शिकायत में कहा है कि 13 जून 2023 को उन्हें लगभग 12 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान दो महिला कर्मचारियों ने उनके साथ मारपीट करने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि उसी वर्ष उनके साथ यौन उत्पीड़न की घटना हुई और कपड़े बदलते समय वीडियो रिकॉर्ड किया गया।

2025 की घटना का भी किया जिक्र

शिकायतकर्ता ने अदालत को बताया कि 9 सितंबर 2025 को प्रॉक्टोरियल बोर्ड कार्यालय में एक बार फिर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। आरोप है कि वर्दीधारी एक कर्मचारी ने उन्हें जबरन पकड़ने की कोशिश की और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान उनका मोबाइल फोन छीनकर तोड़ दिया गया।

पुलिस से शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

पूर्व महिला खिलाड़ी का कहना है कि उन्होंने घटना के बाद लंका थाने में शिकायत दी थी। इसके अलावा 24 जून 2026 को पुलिस आयुक्त को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भी प्रार्थना पत्र भेजा, लेकिन किसी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। न्याय नहीं मिलने पर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

CJM कोर्ट ने लिया संज्ञान

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने शिकायत को स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई 8 जुलाई को निर्धारित की है। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए एक सुरक्षाधिकारी को नोटिस जारी किया है। अब आगामी सुनवाई में मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार किया जाएगा।

BHU प्रशासन ने क्या कहा?

मामले पर बीएचयू के चीफ प्रॉक्टर प्रो. संदीप पोखरिया ने कहा कि यह पुराना मामला है। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन अदालत की प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगा।