{"vars":{"id": "130921:5012"}}

BHU जूनियर डॉक्टर सुसाइड अटेम्प्ट केस : रेजिडेंट डॉक्टरों का 24 घंटे का अल्टीमेटम, मांगे न पूरी होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

 

वाराणसी। बनारस हिंदू यूनिवसर्टी (Banaras Hindu University) के चिकित्सा संस्थान Institute of Medical Sciences, BHU (IMS-BHU) में सर्जरी विभाग की एक जूनियर डॉक्टर द्वारा आत्महत्या का प्रयास किए जाने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर रेजिडेंट डॉक्टरों में आक्रोश है।

मंगलवार को भी जूनियर डॉक्टरों ने अस्पताल के निदेशक का घेराव कर अपनी मांगें रखीं। हालांकि निदेशक की ओर से मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, लेकिन जूनियर डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें मौखिक नहीं बल्कि लिखित आदेश चाहिए। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत फिलहाल बेनतीजा रही।

24 घंटे का अल्टीमेटम

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष Dr. Ambuj ने कहा कि यदि 24 घंटे के भीतर उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई शुरू नहीं की जाती, तो रेजिडेंट डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

उन्होंने कहा कि हड़ताल की स्थिति में इमरजेंसी और आईसीयू जैसी आवश्यक सेवाओं को छोड़कर अस्पताल की अन्य सेवाएं तत्काल प्रभाव से बंद कर दी जाएंगी।

जूनियर डॉक्टरों की प्रमुख मांगें

जूनियर डॉक्टरों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—

आत्महत्या के लिए उकसाने के जिम्मेदार लोगों को तत्काल निलंबित या निष्कासित किया जाए।

पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

जनरल सर्जरी विभाग के संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराकर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

जांच समिति में रेजिडेंट डॉक्टरों को भी शामिल किया जाए।

जांच की प्रगति की नियमित जानकारी रेजिडेंट्स को दी जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए मानवीय और निश्चित कार्य घंटे लागू किए जाएं, जो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की सिफारिशों के अनुरूप हों।

जरूरत के अनुसार स्टाफ की संख्या बढ़ाई जाए।

प्रथम वर्ष के जूनियर रेजिडेंट्स के साथ होने वाली कार्यस्थल पर विषाक्तता और रैगिंग पर सख्त रोक लगाई जाए।

इंसुलिन की अधिक डोज लेने से बिगड़ी हालत

घटना पिछले शुक्रवार की बताई जा रही है। सर्जरी विभाग की एक जूनियर डॉक्टर ने कथित तौर पर 100 यूनिट इंसुलिन इंजेक्शन की अधिक मात्रा ले ली, जिसके बाद उनकी तबीयत गंभीर हो गई। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कर वेंटिलेटर पर रखा गया।

बताया जा रहा है कि इस घटना के पीछे कुछ वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा उत्पीड़न और दबाव भी एक कारण हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

जांच के लिए गठित की गई समिति

इस पूरे मामले पर IMS-BHU के निदेशक Prof. S. N. Sankhwar ने कहा कि घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इधर, रेजिडेंट डॉक्टर इस घटना के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं और प्रशासन से जल्द ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।