BHU बनेगा टू-डी मटेरियल का राष्ट्रीय इनोवेशन हब, 600 करोड़ की मेगा योजना
वाराणसी: भविष्य की इलेक्ट्रॉनिक्स और अत्याधुनिक तकनीकों में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। रक्षा, अंतरिक्ष, चिकित्सा और क्वांटम तकनीक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उपयोग होने वाले टू-डी (द्वि-आयामी) मटेरियल के विकास के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) को राष्ट्रीय इनोवेशन हब के रूप में विकसित करने की योजना है।
केंद्र सरकार की हब एंड स्पोक नीति के तहत देश के 13 प्रमुख विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के लगभग 63 वैज्ञानिक इस महत्वाकांक्षी परियोजना से जुड़ेंगे। इसके लिए करीब 600 करोड़ रुपये की विस्तृत कार्ययोजना केंद्र सरकार को भेजी गई है। इस परियोजना को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है।
इस पहल के अंतर्गत भारत में ही इलेक्ट्रॉनिक प्रोटोटाइप, डिवाइस और अत्याधुनिक कंपोनेंट्स विकसित किए जाएंगे। साथ ही सेंसर, मेमोरी डिवाइस, क्वांटम तकनीक और टू-डी माइक्रोप्रोसेसर चिप के निर्माण पर विशेष रूप से काम होगा। इसके अलावा स्टार्टअप्स को इंक्यूबेशन और मेंटरशिप, उच्च गुणवत्ता वाले पेटेंट तथा टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
बीएचयू के विज्ञान संस्थान के भौतिकी विभाग द्वारा इस परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया गया है। विभागाध्यक्ष प्रो. आंचल श्रीवास्तव के अनुसार, टू-डी मटेरियल ऊष्मा और विद्युत के उत्कृष्ट चालक होने के साथ-साथ पारदर्शी भी होते हैं, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक इंडस्ट्री में इनके व्यापक उपयोग की संभावनाएं हैं।
परियोजना के तहत एक राष्ट्रीय डेटाबेस और वेब पोर्टल भी विकसित किया जाएगा। विकसित तकनीकों के बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) शोध संस्थानों के पास रहेंगे, जबकि उद्योगों को इनके व्यावसायिक उपयोग की अनुमति दी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में अग्रणी बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
क्या है टू-डी मटेरियल और कैसे बनता है
सामान्य वस्तुएं थ्री-डी होती हैं, लेकिन टू-डी मटेरियल की मोटाई केवल एक परमाणु के बराबर होती है। इन्हें बनाने के लिए स्कॉच टेप मेथड, केमिकल वेपर डिपोजीशन, केमिकल सिंथेसिस और लिक्विड फेज एक्सफोलिएशन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
इस परियोजना में शामिल प्रमुख संस्थान
आईआईटी-बीएचयू, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, एबीवी-आईआईआईटीएम ग्वालियर, दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर, जेपीआईआईटी नोएडा, लखनऊ विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, आईआईआईटी चित्तूर, एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा, आईआईआईटी रांची, आईआईआईटी सोनीपत और सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु।
औद्योगिक भागीदार
ग्लोबल मार्केटिंग सर्विसेज (बेंगलुरु), तोशनीवाल ब्रदर्स एसआर प्रा.लि., ई-स्पिन नैनोटेक प्रा.लि. (कानपुर) और बीटीसीओआरपी (बेंगलुरु)।