जूनियर डॉक्टर सुसाइड अटेम्प्ट मामले में 3 सदस्यीय कमिटी गठित, सीनियर डॉक्टरों पर प्रताड़ना का आरोप
बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में सर्जरी विभाग की पीजी छात्रा द्वारा आत्महत्या के प्रयास के बाद प्रशासन ने तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की है। छात्रा ने दो सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों पर मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। समिति को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में एक पीजी छात्रा द्वारा आत्महत्या का प्रयास किए जाने की घटना से परिसर में हड़कंप मच गया है। सर्जरी विभाग की जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने इंसुलिन की अधिक मात्रा लेकर जान देने की कोशिश की, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान प्रशासन ने जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।
सीनियर डॉक्टरों पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप
छात्रा ने इस घटना से पहले संस्थान के निदेशक को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि विभाग के दो सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। छात्रा के अनुसार, सीनियर डॉक्टर राहुल राज और उत्सव गांगुली उसे पेशेवर रूप से अक्षम बताते हुए बार-बार अपमानित करते थे।
पत्र में छात्रा ने लिखा कि उसे यह तक कहा जाता था कि वह सर्जरी के लिए बनी ही नहीं है और जिंदगी में कुछ नहीं कर पाएगी।
परिजनों और साथियों ने भी लगाए गंभीर आरोप
छात्रा के परिजनों और सहकर्मियों का कहना है कि इस मामले की शिकायत चार दिन पहले ही विभाग के अधिकारियों और वरिष्ठ डॉक्टरों को दी गई थी। आरोप है कि छात्रा कई बार रोते हुए अपनी परेशानी बता चुकी थी, लेकिन उसके बावजूद उत्पीड़न का सिलसिला नहीं रुका। बताया जा रहा कि पिछले दो दिनों से छात्रा की मानसिक स्थिति काफी खराब थी, जिसके बाद उसने यह कदम उठा लिया।
दरवाजा तोड़कर छात्रा को अस्पताल पहुंचाया गया
जानकारी के अनुसार 27 वर्षीय छात्रा बिहार के समस्तीपुर जिले की रहने वाली है और वाराणसी में सामने घाट के पास किराए के मकान में रहती है। छात्रा की एक मित्र ने बताया कि देर रात उसने कई बार फोन किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। आखिरकार दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया, जहां छात्रा बेसुध हालत में मिली। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां आईसीयू में भर्ती कर इलाज किया जा रहा है।
छात्रों का प्रदर्शन, कार्रवाई की मांग
घटना की जानकारी मिलने के बाद शनिवार शाम सौ से अधिक छात्रों ने संस्थान परिसर में प्रदर्शन किया। छात्रों ने संस्थान के निदेशक का घेराव करते हुए आरोपित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रों ने यह भी मांग की कि पीड़ित छात्रा का इलाज पूरी तरह निशुल्क कराया जाए।
तीन सदस्यीय जांच समिति गठित
मामले की जांच के लिए संस्थान के निदेशक प्रो. एस.एन. संखवार ने तीन सदस्यीय समिति गठित की है। समिति की अध्यक्षता चिकित्सा संकाय के डीन को सौंपी गई है। इसके अलावा सर्जरी विभाग की प्रो. सीमा खन्ना और संस्थान के उप मुख्य आरक्षाधिकारी को भी समिति में शामिल किया गया है। समिति को पूरे मामले की जांच कर सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।