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BHU के शोधकर्ताओं को मिली बड़ी कामयाबी, दूध प्रोटीन और एलोवेरा से बनी एंटासिड टैबलेट को मिला भारतीय पेटेंट

 

वाराणसी। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य और डेयरी विज्ञान के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय की शोध टीम द्वारा दूध प्रोटीन और एलोवेरा पर आधारित नवीन मिश्रित एंटासिड टैबलेट विकसित की गई है, जिसे भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से भारतीय पेटेंट मिल गया है। इस आविष्कार का नेतृत्व बीएचयू के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. दिनेश चंद्र राय ने किया है।

भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने इस आविष्कार को पेटेंट संख्या 597350 प्रदान किया है। इसका आवेदन संख्या 202311057324 है। यह शोध बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के अंतर्गत डेयरी साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी विभाग में किया गया। शोध टीम में प्रो. दिनेश चंद्र राय के साथ प्रो. राज कुमार दुआरी, डॉ. अरविंद, डॉ. रुचि चावला, रिधि पांडे और कृष्ण कुमार शामिल रहे।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस नवाचार में दूध से प्राप्त प्रोटीन और एलोवेरा जैसे घटकों का इस्तेमाल कर एंटासिड टैबलेट तैयार की गई है। इसका उद्देश्य अम्लता यानी एसिडिटी की समस्या के दैनिक प्रबंधन के लिए एक प्रोटीन युक्त विकल्प विकसित करना है। हालांकि, इसके व्यापक चिकित्सकीय उपयोग से पहले क्लिनिकल परीक्षण और आगे की वैज्ञानिक जांच महत्वपूर्ण होगी।

प्रो. दिनेश चंद्र राय ने बताया कि पेटेंट मिलने के बाद इस शोध को आगे बढ़ाने के लिए क्लिनिकल परीक्षण, बड़े स्तर पर उत्पादन और व्यावसायीकरण की संभावनाएं खुली हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि स्वदेशी नवाचार, डेयरी उत्पादों के मूल्य संवर्धन और पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इस उपलब्धि को बीएचयू के शैक्षणिक समुदाय और पूर्ववर्ती छात्र संघों ने भी सराहा है। उन्होंने शोध टीम और प्रो. राय को बधाई देते हुए इसे विश्वविद्यालय की शोध परंपरा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

दूध प्रोटीन और एलोवेरा आधारित इस एंटासिड टैबलेट का विकास स्वास्थ्य के साथ-साथ डेयरी क्षेत्र के लिए भी संभावनाएं पैदा करता है। यदि आगे के परीक्षणों में इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा स्थापित होती है, तो भविष्य में यह एसिडिटी के प्रबंधन के लिए एक नए विकल्प के रूप में विकसित की जा सकती है।

बीएचयू की इस उपलब्धि ने एक बार फिर विश्वविद्यालय में हो रहे शोध और नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। शोध टीम की यह पहल स्वास्थ्य विज्ञान और डेयरी तकनीक के बीच नए प्रयोगों की संभावनाओं को भी सामने रखती है।