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BHU हिंसा पर बड़ा खुलासा: जातिगत विवाद नहीं, जन्माष्टमी की पुरानी रंजिश से भड़की थी हिंसा

बीएचयू परिसर में हुई हिंसा को लेकर प्राक्टोरियल जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। मामला न जातिगत है, न ही तात्कालिक हॉस्टल विवाद का। जांच में जन्माष्टमी से चली आ रही पुरानी रंजिश, डिबार बाहरी छात्रों की भूमिका और पीड़ित की वास्तविक पहचान सामने आई है।

 

वाराणसी: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) परिसर में हाल ही में छात्रों के दो गुटों के बीच हुई हिंसक झड़प को लेकर प्राक्टोरियल बोर्ड की जांच में अहम खुलासे सामने आए हैं। जांच में स्पष्ट हुआ है कि यह घटना किसी तात्कालिक हॉस्टल विवाद या जातिगत तनाव से जुड़ी नहीं थी, बल्कि जन्माष्टमी के दौरान शुरू हुई पुरानी रंजिश का परिणाम थी।

प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि घायल छात्र पीयूष कुमार तिवारी, जिसे रुइया हॉस्टल का छात्र बताया जा रहा था, वास्तव में उस हॉस्टल का अंतेवासी नहीं है। वह संस्कृत विद्याधर्म विज्ञान संकाय का पूर्व छात्र है और वर्तमान में कला संकाय से एमए संस्कृत की पढ़ाई कर रहा है। वह डित्तूपुर में किराए के मकान में रहता है और उसके नाम से किसी हॉस्टल में कोई कमरा आवंटित नहीं है।

जांच में यह भी साफ हुआ है कि पीयूष द्वारा जिन सात हमलावरों की पहचान की गई है, उनमें से चार पहले ही विश्वविद्यालय से डिबार किए जा चुके बाहरी तत्व हैं। शेष तीन आरोपी बीएचयू के छात्र हैं। बिड़ला ‘सी’ हॉस्टल में चलाए गए सर्च अभियान के दौरान दो बाहरी छात्रों को पकड़ा गया था, जिनके कमरे फिलहाल सील कर दिए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुल 11 कमरों को सील किया था, जिनमें से जांच के बाद नौ कमरों को खोल दिया गया है।

प्राक्टोरियल बोर्ड के अनुसार, जन्माष्टमी के दिन दोनों गुटों के बीच गंभीर कहासुनी हुई थी, जिसकी खुन्नस बाद में रुइया हॉस्टल के पास हिंसक टकराव में बदल गई। इस दौरान गाली-गलौच, मारपीट और जमकर पत्थरबाजी हुई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हॉस्टलों में ‘गेस्ट’ के नाम पर रह रहे बाहरी तत्वों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

पीयूष का आरोप: हमलावरों ने घेरा, रॉड से सिर पर वार

हिंसक झड़प में घायल छात्र पीयूष कुमार तिवारी ने लंका थाने में तहरीर देकर इसे जान से मारने की सुनियोजित साजिश बताया है। पीयूष के अनुसार, गुरुवार शाम करीब चार बजे रुइया हॉस्टल परिसर में 30 से 40 नकाबपोश युवक बाइकों से पहुंचे और उसे घेर लिया। मुख्य आरोपी दर्शित पांडेय ने लोहे की रॉड से सिर पर हमला किया, जबकि अन्य आरोपियों ने लाठी-डंडों से पिटाई की।

हमले में पीयूष के सिर में छह टांके लगे हैं। तहरीर में उसने दर्शित पांडेय को मुख्य आरोपी तथा श्वेताभ, अरुण, शशांक सिंह, रौशन मिश्रा, विशाल राय और विश्वजीत यादव को सह-आरोपी नामजद किया है। पीयूष का आरोप है कि जब प्राक्टोरियल बोर्ड के सदस्य और अन्य छात्र उसे बचाने पहुंचे तो हमलावर गोली मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए।

पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन अब डिबार किए गए छात्रों की तलाश में जुटा है, जिन्हें परिसर की शांति भंग करने में मुख्य भूमिका निभाने वाला माना जा रहा है।