UGC नियम के समर्थन में बीएचयू छात्रों ने निकाला मार्च, सुप्रीम कोर्ट के स्टे पर जताई नाराजगी
Varanasi : बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के विश्वनाथ मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में छात्र एकत्रित हुए, जहां उन्होंने सामाजिक न्याय और समानता के मुद्दों पर जोरदार प्रदर्शन किया। एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के छात्रों ने UGC (Promotion of Equity in Higher Educational Institutions) Regulations, 2026 के समर्थन में एक मार्च निकाला, जो हाल ही में जारी किए गए हैं। इस दौरान विश्वविद्यालय का प्रॉक्टोरियल बोर्ड और पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में रहा, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि UGC के नए नियम जातिगत भेदभाव को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, लेकिन हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन नियमों पर लगाए गए स्टे ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी को इन नियमों को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम स्टे दे दिया, जिसमें नियमों को 'गैर-समावेशी' बताते हुए सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ भेदभाव का आरोप लगाया गया है।
छात्रों का मार्च और मांगें
विश्वनाथ मंदिर से शुरू हुआ यह मार्च बीएचयू कैंपस में घूमकर समाप्त हुआ। प्रदर्शन में शामिल छात्र शिवम सोनकर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया यह बिल सुप्रीम कोर्ट से पास कराया जाए। हम इसी के लिए यह रैली निकाल रहे हैं। केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, उच्च शिक्षा संस्थानों में 118% जातिगत भेदभाव के मामले सामने आए हैं। छात्र ने बताया कि पिछले साल मार्च में वह खुद अपने एडमिशन को लेकर धरने पर बैठा था, आज UGC बिल के समर्थन में और जातिगत भेदभाव के खिलाफ सभी छात्रों के साथ खड़ा है। हम तब तक लड़ेंगे जब तक यह बिल पूरी तरह लागू नहीं हो जाता।
विवाद की पृष्ठभूमि
UGC ने 13 जनवरी 2026 को ये नियम अधिसूचित किए थे, जिनमें उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए 'इक्विटी स्क्वॉड' गठित करने, शिकायतों की जांच और दंड का प्रावधान है। हालांकि, सामान्य वर्ग के छात्रों ने इन्हें 'रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन' बताते हुए विरोध किया। दिल्ली में UGC मुख्यालय के बाहर, लखनऊ यूनिवर्सिटी और JNU में भी विरोध प्रदर्शन हुए। वाराणसी में भी महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में इसी मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन हुआ, जहां छात्रों ने नियमों को 'स्टूडेंट-अनफ्रेंडली' बताया।
यह घटना UGC नियमों को लेकर देशव्यापी बहस को और तेज कर रही है। एक तरफ एससी/एसटी/ओबीसी छात्र इन्हें न्याय का माध्यम बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सामान्य वर्ग के छात्र मिसयूज और सर्विलांस की आशंका जता रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी को है।