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BHU महिला प्रोफेसर छेड़छाड़ केस में फैसला, प्रभारी सौरभ सिंह की अंतिम रिपोर्ट कोर्ट ने की खारिज, दोबारा जांच के आदेश

वाराणसी के BHU ट्रामा सेंटर की महिला प्रोफेसर से कथित छेड़छाड़ मामले में कोर्ट ने लंका पुलिस की अंतिम रिपोर्ट खारिज कर दी है। पीड़िता की आपत्ति स्वीकार करते हुए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अग्रिम विवेचना के आदेश दिए। महिला प्रोफेसर ने जांच में बयान और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की अनदेखी का आरोप लगाया था।

 

वाराणसी: बीएचयू ट्रामा सेंटर की महिला प्रोफेसर से कथित छेड़छाड़ के मामले में अदालत ने लंका पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए दाखिल अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर दिया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (नवम) अमित कुमार यादव की अदालत ने पीड़ित महिला प्रोफेसर की ओर से दाखिल प्रोटेस्ट प्रार्थना-पत्र स्वीकार करते हुए मामले में अग्रिम विवेचना के आदेश दिए हैं।

यह मामला ट्रामा सेंटर के पूर्व प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों से जुड़े आरोपों का है। पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद मामले में अंतिम रिपोर्ट अदालत में दाखिल की थी। महिला प्रोफेसर ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए कोर्ट में प्रोटेस्ट प्रार्थना-पत्र दाखिल किया था।

महिला प्रोफेसर ने जांच में कमियां होने का लगाया आरोप

पीड़िता ने अपनी आपत्ति में विवेचना की प्रक्रिया पर कई सवाल उठाए। उनका आरोप था कि जांच के दौरान उनका समुचित बयान दर्ज नहीं किया गया। इसके अलावा स्वतंत्र गवाहों के बयान भी दर्ज नहीं किए गए।

प्रोटेस्ट प्रार्थना-पत्र में यह भी कहा गया कि घटनास्थल का निरीक्षण नहीं किया गया और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक तथा अन्य साक्ष्यों की पर्याप्त जांच नहीं हुई।

महिला प्रोफेसर की ओर से उठाए गए इन्हीं बिंदुओं के आधार पर अदालत ने अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और मामले में आगे की विवेचना कराने का आदेश दिया।

क्या है पूरा मामला?

प्रकरण के मुताबिक, बीएचयू ट्रामा सेंटर के एनेस्थीसिया विभाग में तैनात महिला प्रोफेसर ने पूर्व ट्रामा सेंटर प्रभारी प्रो. सौरभ सिंह और सुरक्षाकर्मियों पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाया था।

महिला प्रोफेसर के मुताबिक, उनके साथ कथित तौर पर आए दिन अभद्रतापूर्ण व्यवहार किया जाता था। उन्होंने इस संबंध में ट्रामा सेंटर के निदेशक से मौखिक शिकायत भी की थी। बाद में सुरक्षाकर्मियों पर गलत नीयत से उनके साथ धक्का-मुक्की करने का आरोप लगाते हुए लंका थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।

विवेचना में दो बाउंसरों के नाम सामने आए

मामले की पुलिस विवेचना के दौरान बाउंसर धनंजय राय और आशीष सिंह के नाम सामने आए थे। पुलिस ने जांच के बाद अदालत में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की थी। हालांकि, पीड़िता ने पुलिस की इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और कहा कि विवेचना के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पर्याप्त जांच नहीं की गई।

अब आगे क्या होगा?

अदालत ने महिला प्रोफेसर की ओर से दाखिल प्रोटेस्ट प्रार्थना-पत्र स्वीकार करते हुए लंका थानाध्यक्ष को अग्रिम विवेचना कराने का आदेश दिया है।

अब पुलिस को पीड़िता की ओर से उठाए गए बिंदुओं के आधार पर मामले की आगे जांच करनी होगी। इसमें बयान, स्वतंत्र गवाहों, घटनास्थल और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक व अन्य साक्ष्यों से जुड़े पहलुओं की जांच शामिल हो सकती है।

अदालत के इस आदेश के बाद मामले की जांच एक बार फिर आगे बढ़ेगी। हालांकि, अग्रिम विवेचना के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि आरोप अदालत में साबित हो चुके हैं। मामले में आगे की पुलिस जांच और उसके बाद न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर स्थिति स्पष्ट होगी।