BHU में फेफड़ों के कैंसर की जांच हुई आसान, एंडोब्रॉन्कियल अल्ट्रासाउंड मशीन से बिना बड़ी सर्जरी होगी बायोप्सी
वाराणसी के BHU सर सुंदरलाल अस्पताल में करीब एक करोड़ रुपये की EBUS मशीन लगाई गई है। इससे फेफड़ों के कैंसर, टीबी और छाती के भीतर बढ़े लिम्फ नोड्स की जांच में मदद मिलेगी। बिना बड़ी सर्जरी संदिग्ध गांठों की बायोप्सी संभव होगी। अब तक 15 मरीजों की जांच की जा चुकी है।
वाराणसी। पूर्वांचल के मरीजों को फेफड़ों के कैंसर और श्वास नली से जुड़ी गंभीर बीमारियों की जांच के लिए अब बड़ी सर्जरी जैसी जटिल प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत कम हो सकेगी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के सर सुंदरलाल अस्पताल के श्वसन रोग चिकित्सा विभाग में करीब एक करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक एंडोब्रॉन्कियल अल्ट्रासाउंड (EBUS) मशीन उपलब्ध कराई गई है। इस मशीन से फेफड़ों के आसपास की संदिग्ध गांठों और छाती के भीतर मौजूद लिम्फ नोड्स की सटीक बायोप्सी की जा सकेगी। अस्पताल में इस सुविधा से जांच शुरू हो चुकी है और अब तक 15 मरीजों की जांच की जा चुकी है।
बिना बड़ी सर्जरी संदिग्ध गांठों की होगी बायोप्सी
EBUS तकनीक की मदद से श्वास नली के रास्ते एक विशेष उपकरण शरीर के भीतर पहुंचाया जाता है। इसके बाद अल्ट्रासाउंड की सहायता से अंदरूनी संरचनाओं को देखा जाता है और संदिग्ध स्थान से बायोप्सी के लिए नमूना लिया जाता है। इससे मरीज को बड़ी सर्जरी की जटिल प्रक्रिया से गुजारे बिना जांच करने में मदद मिलती है।
फेफड़ों के कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान और बीमारी के फैलाव का आकलन करने में यह तकनीक उपयोगी है। इससे चिकित्सकों को बीमारी की स्थिति समझने और समय पर उचित उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।
कैंसर के अलावा टीबी की पहचान में भी उपयोगी
अस्पताल में उपलब्ध कराई गई EBUS मशीन का इस्तेमाल केवल फेफड़ों के कैंसर की जांच तक सीमित नहीं है। यह टीबी, सारकॉइडोसिस और छाती के भीतर लिम्फ नोड्स बढ़ने के कारणों का पता लगाने में भी उपयोगी है।
इस सुविधा के शुरू होने से उन मरीजों को लाभ मिल सकता है, जिनकी बीमारी की सही पहचान के लिए छाती के भीतर मौजूद संदिग्ध गांठों या लिम्फ नोड्स से नमूना लेना जरूरी होता है। विभाग में चिकित्सकों की टीम इस जांच सुविधा का संचालन कर रही है।
पूर्वांचल के सरकारी अस्पतालों में पहली बार उपलब्ध हुई सुविधा
आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने बताया कि यह सुविधा अब तक पूर्वांचल के सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने कहा कि नई मशीन बीमारियों के उपचार में मददगार साबित होगी।
करीब एक करोड़ रुपये की लागत से उपलब्ध कराई गई इस मशीन से सर सुंदरलाल अस्पताल में गंभीर श्वसन रोगों की जांच की सुविधा बढ़ी है। अब तक 15 मरीजों की जांच की जा चुकी है और इस तकनीक से फेफड़ों के कैंसर समेत अन्य बीमारियों की पहचान में मदद मिलेगी।