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गंगा में नाव संचालन पर बड़ा बदलाव: अब हर बोट को मिलेगा अलग नंबर, एक लाइसेंस पर चलेगी एक ही नाव 

वाराणसी में गंगा नदी में संचालित नावों और बजड़ों के लिए नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। अब प्रत्येक नाव का अलग पंजीकरण होगा और उस पर आरटीओ द्वारा जारी नंबर प्लेट लगाई जाएगी। यात्रियों की सुरक्षा, जवाबदेही और गंगा में बढ़ते ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए एसओपी तैयार की जा रही है।

 

वाराणसी: गंगा में संचालित नावों और बजड़ों के संचालन को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए परिवहन विभाग बड़ा बदलाव करने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत अब एक लाइसेंस पर केवल एक ही नाव संचालित की जा सकेगी। यदि किसी संचालक के पास एक से अधिक नावें हैं तो प्रत्येक नाव के लिए अलग-अलग पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। साथ ही सभी नावों पर आरटीओ द्वारा जारी नंबर प्लेट लगाई जाएगी, जिसमें नाव से संबंधित पूरी जानकारी दर्ज होगी।

नावों और बजड़ों के लिए तैयार हो रही नई SOP

क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) की ओर से नावों और बजड़ों के संचालन के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार की जा रही है। इस एसओपी में नावों के पंजीकरण, संचालन, रूट निर्धारण, शुल्क व्यवस्था, यात्री क्षमता और सुरक्षा मानकों समेत कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे गंगा में बढ़ते नाव यातायात को नियंत्रित करने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

गंगा में चल रही हैं करीब 4 हजार नावें

जानकारी के अनुसार वाराणसी में गंगा नदी में करीब 4,000 नावें संचालित हो रही हैं। इनमें बड़ी संख्या मोटरबोट की है, जिसके कारण नदी में प्रदूषण और जल यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

अब तक नावों और बजड़ों का पंजीकरण नगर निगम के माध्यम से किया जाता रहा है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में 1,217 छोटी-बड़ी नावें पंजीकृत हैं। हालांकि पिछले दो वर्षों से नगर निगम में नावों के नए पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया बंद है।

नंबर प्लेट से तय होगी जवाबदेही

नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाहनों की तरह हर नाव को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी। नाव पर लगने वाली नंबर प्लेट के जरिए उसके मालिक, पंजीकरण, क्षमता और अन्य तकनीकी जानकारियों का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

अधिकारियों का कहना है कि इससे किसी दुर्घटना या नियम उल्लंघन की स्थिति में संबंधित संचालक की पहचान करना आसान होगा और जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।

IRS कर रहा है सर्वेक्षण

आरटीओ की ओर से नामित संस्था इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) वर्तमान में गंगा में संचालित नावों और बजड़ों का सर्वेक्षण कर रही है। सर्वे के आधार पर नावों की तकनीकी स्थिति, आकार और यात्री क्षमता का मूल्यांकन किया जा रहा है।

तीन श्रेणियों में बांटी जा रही हैं नावें

सर्वेक्षण के दौरान नावों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा रहा है- A श्रेणी: 24 मीटर से अधिक लंबाई वाली नावें, B श्रेणी: 10 मीटर से 24 मीटर तक लंबाई वाली नावें, C श्रेणी: 10 मीटर से कम लंबाई वाली नावें। इन श्रेणियों का निर्धारण नाव की लंबाई, यात्री क्षमता और अन्य तकनीकी मानकों के आधार पर किया जा रहा है।

सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन पर रहेगा फोकस

परिवहन विभाग का मानना है कि नई एसओपी लागू होने के बाद गंगा में बढ़ते जल यातायात को नियंत्रित करने, प्रदूषण कम करने और यात्रियों को सुरक्षित सफर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही नाव संचालकों की जवाबदेही भी तय होगी और अव्यवस्थित संचालन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।