नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में भाजपा का दबदबा, कांग्रेस की मौजूदगी से सपा को एक सीट का नुकसान
वाराणसी। नगर निगम कार्यकारिणी के छह सदस्यों के सेवानिवृत्त होने के बाद शुक्रवार को टाउनहॉल में हुए चुनाव में भाजपा ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं समाजवादी पार्टी को एक सीट मिली, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस की मौजूदगी के कारण चुनाव हुआ और इसका सीधा असर सपा पर पड़ा। चुनाव परिणाम के बाद 12 सदस्यीय कार्यकारिणी में भाजपा के 11 और सपा का एक सदस्य रह गया है। इससे पहले सपा के दो सदस्य कार्यकारिणी में थे।
मेयर अशोक कुमार तिवारी की अध्यक्षता में दोपहर ढाई बजे शुरू हुई चुनाव प्रक्रिया करीब साढ़े पांच घंटे बाद रात आठ बजे परिणाम घोषित होने के साथ पूरी हुई। चुनाव में भाजपा के नरसिंह दास, बलराम कन्नौजिया, इंद्रारानी, संदीप रघुवंशी और संजय केशरी विजयी रहे। समाजवादी पार्टी के गोविंद सिंह पटेल ने भी जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी गुलशन अली चुनाव हार गए।
कार्यकारिणी के छह सदस्य 27 जून को सेवानिवृत्त हुए थे। इन्हीं छह रिक्त पदों के लिए चुनाव कराया गया। चुनाव के लिए कुल आठ प्रत्याशियों ने नामांकन किया था, लेकिन पर्याप्त समर्थन न होने के कारण सपा प्रत्याशी अमरदेव यादव ने नाम वापस ले लिया। इसके बाद सात प्रत्याशी मैदान में रह गए। कांग्रेस प्रत्याशी गुलशन अली ने नाम वापस नहीं लिया, जिसके चलते चुनाव कराना पड़ा।
107 मतदाताओं ने किया मतदान
कार्यकारिणी चुनाव में कुल 112 मतदाता शामिल थे। इनमें से 107 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस तरह चुनाव में रिकॉर्ड 95.53 प्रतिशत मतदान हुआ। मतदान के दौरान एक मत अवैध घोषित किया गया। मतगणना के बाद निर्वाचन अधिकारी एवं सहायक लेखा अधिकारी अयोध्या प्रसाद तिवारी ने विजयी प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की।
एक सीट के लिए 16 वोट जरूरी
कार्यकारिणी चुनाव में एक सीट जीतने के लिए 16 मतों की आवश्यकता थी। एकल संक्रमणीय पद्धति यानी सिंगल ट्रांसफरेबल वोट से हुए चुनाव में संदीप रघुवंशी को प्रथम वरीयता के 17 मत मिले। वहीं बलराम कन्नौजिया, इंद्रारानी, संजय केशरी, नरसिंह दास और गोविंद सिंह पटेल को 16-16 मत मिले। कांग्रेस प्रत्याशी गुलशन अली को नौ मत प्राप्त हुए।
राज्यमंत्री, विधायक और एमएलसी ने डाले वोट
चुनाव में राज्यमंत्री रविंद्र जायसवाल और हंसराज विश्वकर्मा ने मतदान किया। विधायकों में डॉ. नीलकंठ तिवारी, सौरभ श्रीवास्तव और सुनील पटेल ने वोट डाला। विधान परिषद सदस्यों में धर्मेंद्र राय, अन्नपूर्णा सिंह और सपा के स्नातक एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने मतदान किया।
पीएम मोदी समेत पांच मतदाता नहीं डाल सके वोट
शहर से बाहर होने के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पांच मतदाता मतदान नहीं कर सके। इनमें कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर, राज्यमंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र 'दयालु', सपा सांसद वीरेंद्र सिंह और निर्दलीय पार्षद अर्चना यादव शामिल रहे।
कांग्रेस प्रत्याशी नाम वापस लेते तो नहीं होता चुनाव
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यदि कांग्रेस प्रत्याशी गुलशन अली नाम वापस ले लेते तो चुनाव की नौबत नहीं आती और सपा के दो सदस्यों का कार्यकारिणी में पहुंचना लगभग तय माना जा रहा था। हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी के चुनाव मैदान में बने रहने से मतदान कराना पड़ा। कांग्रेस प्रत्याशी की हार के साथ सपा को भी एक संभावित सीट का नुकसान हुआ और इसका लाभ भाजपा को मिला। भाजपा ने चार के बजाय पांच सीटों पर जीत दर्ज की।