BLW का बड़ा प्लान: 83 अमृत भारत ट्रेनों को मिलेगी रफ्तार, बनारस में तैयार होंगे 166 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव
BLW को वित्तीय वर्ष 2026-27 में 468 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बनाने का लक्ष्य मिला है। इनमें 166 इंजन अमृत भारत ट्रेनों के लिए होंगे। पुश-पुल तकनीक से 83 ट्रेनों को रफ्तार मिलेगी। नए लोको में कवच, एयरोडायनेमिक डिजाइन और क्रू-कम्फर्ट जैसी सुविधाएं शामिल की जा रही हैं।
वाराणसी: बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW) इस वित्तीय वर्ष में अमृत भारत ट्रेनों के लिए बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव तैयार करने जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में BLW को कुल 468 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बनाने का लक्ष्य मिला है। इनमें 166 इंजन अमृत भारत ट्रेनों के लिए तैयार किए जाएंगे। इन इंजनों से करीब 83 अमृत भारत ट्रेनों को पुश-पुल तकनीक के जरिए रफ्तार मिलेगी।
खास बात यह है कि अमृत भारत ट्रेनों के लिए बनने वाले इंजनों की संख्या पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 12 गुना अधिक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में BLW ने 14 अमृत भारत लोकोमोटिव तैयार किए थे। इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 166 पहुंचने वाला है।
83 ट्रेनों को दो इंजन देंगे रफ्तार
अमृत भारत ट्रेनों में पुश-पुल तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें ट्रेन के आगे और पीछे दोनों तरफ इंजन लगाए जाते हैं। यानी एक ट्रेन को दो लोकोमोटिव रफ्तार देते हैं। इसी हिसाब से 166 अमृत भारत इंजन करीब 83 ट्रेनों के संचालन में इस्तेमाल किए जा सकेंगे।
पिछले वित्तीय वर्ष में BLW ने कुल 572 लोकोमोटिव बनाए थे। इनमें अमृत भारत ट्रेनों के लिए 14 इंजन शामिल थे। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में अकेले अमृत भारत के लिए 166 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बनाने का लक्ष्य है। BLW के कुल लक्षित इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव उत्पादन में इनकी हिस्सेदारी करीब 26 प्रतिशत होगी।
सामान्य इंजन से अलग होगा अमृत भारत का लोको
BLW में तैयार किए जा रहे अमृत भारत लोकोमोटिव में लोको पायलट की सुविधा के साथ इंजन की दक्षता और सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है। इंजन के फ्रंट हिस्से को एयरोडायनेमिक डिजाइन दिया गया है। इसका मकसद हवा के प्रतिरोध को कम करना और इंजन की कार्यक्षमता बेहतर करना है।
लोको पायलट के केबिन में भी कई बदलाव किए गए हैं। सामने की ओर बेहतर दृश्यता देने की कोशिश की गई है। बारिश के दौरान विजिबिलिटी बनाए रखने के लिए व्यू कटर जैसी सुविधा दी गई है।
क्रू की सुविधा के लिए केबिन में 360 डिग्री घूमने वाली सीट और AC जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। मोबाइल और अन्य जरूरी छोटी वस्तुओं को रखने के लिए भी व्यवस्थित जगह बनाई गई है।
सुरक्षा पर भी खास जोर
BLW के जनसंपर्क अधिकारी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2026-27 में तैयार किए जा रहे नए लोकोमोटिव में सुरक्षा और क्रू-कम्फर्ट को प्राथमिकता दी जा रही है। इनमें कवच सिस्टम, एयरोडायनेमिक लुक-आउट स्क्रीन और क्रू-फ्रेंडली कैब जैसे बदलाव शामिल किए जा रहे हैं।
नए इंजनों पर भारत का झंडा भी लगाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह देश में तैयार किए जा रहे स्वदेशी लोकोमोटिव और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाता है।
डीजल इंजन बनाने वाले कर्मचारी अब बना रहे इलेक्ट्रिक लोको
BLW की एक खास उपलब्धि यह भी है कि यहां वर्षों तक डीजल इंजन तैयार करने वाले कर्मचारी और इंजीनियर अब इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के निर्माण में योगदान दे रहे हैं। तकनीक में बदलाव के साथ कर्मचारियों और इंजीनियरों को लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
अधिकारी के मुताबिक, BLW में करीब 5 हजार कर्मचारी, सुपरवाइजर और इंजीनियर काम करते हैं। इनमें करीब 300 महिला कर्मचारी शामिल हैं। तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से कर्मचारियों को नई तकनीक और आधुनिक लोकोमोटिव के निर्माण के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
99 फीसदी से ज्यादा काम स्वदेशी तकनीक से
BLW में लोकोमोटिव निर्माण का बड़ा हिस्सा स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। अधिकारियों के मुताबिक, यहां 99 फीसदी से अधिक काम स्वदेशी तकनीक से किया जाता है। इंजन में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर पार्ट्स भी देश में ही तैयार किए जाते हैं।
हाइड्रोजन और सोलर लोको के लिए भी तैयार
भविष्य में हाइड्रोजन या सोलर पावर से चलने वाले लोकोमोटिव के निर्माण को लेकर अधिकारियों का कहना है कि BLW के अधिकारी, इंजीनियर और सुपरवाइजर नई तकनीक अपनाने के लिए तैयार हैं। रेलवे और रेल मंत्रालय की ओर से भविष्य में जो भी लक्ष्य दिया जाएगा, BLW उसे पूरा करने के लिए आवश्यक तकनीकी क्षमता विकसित करने और उत्पादन करने को तैयार रहेगा।
1956 में रखी गई थी नींव, अब तक 11 हजार इंजन तैयार
बनारस रेल इंजन कारखाने की नींव अप्रैल 1956 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने रखी थी। इसके बाद यहां रेल इंजनों के निर्माण का काम शुरू हुआ। 3 जनवरी 1964 को BLW में पहला डीजल लोकोमोटिव तैयार किया गया था।
दशकों तक डीजल इंजन निर्माण के लिए पहचान रखने वाले इस कारखाने ने 2017 के बाद इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव निर्माण की दिशा में बड़ा बदलाव किया। अब यहां आधुनिक इलेक्ट्रिक रेल इंजन तैयार किए जा रहे हैं। जनसंपर्क अधिकारी के मुताबिक, BLW में अब तक करीब 11 हजार रेल इंजनों का निर्माण किया जा चुका है। इनमें 3,200 से अधिक इलेक्ट्रिक रेल इंजन शामिल हैं।
11 देशों को 182 इंजन निर्यात कर चुका BLW
BLW की पहुंच सिर्फ भारतीय रेलवे तक सीमित नहीं है। कारखाने ने विदेशों में भी अपने लोकोमोटिव का निर्यात किया है। अधिकारियों के अनुसार, BLW अब तक 11 देशों को 182 रेल इंजन निर्यात कर चुका है।
कारखाना अब ‘मेक इन इंडिया’ के साथ ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। अमृत भारत ट्रेनों के लिए इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का बढ़ता उत्पादन इसी विस्तार की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।
वाराणसी: बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW) इस वित्तीय वर्ष में अमृत भारत ट्रेनों के लिए बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव तैयार करने जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में BLW को कुल 468 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बनाने का लक्ष्य मिला है। इनमें 166 इंजन अमृत भारत ट्रेनों के लिए तैयार किए जाएंगे। इन इंजनों से करीब 83 अमृत भारत ट्रेनों को पुश-पुल तकनीक के जरिए रफ्तार मिलेगी।
खास बात यह है कि अमृत भारत ट्रेनों के लिए बनने वाले इंजनों की संख्या पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में करीब 12 गुना अधिक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में BLW ने 14 अमृत भारत लोकोमोटिव तैयार किए थे। इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 166 पहुंचने वाला है।
83 ट्रेनों को दो इंजन देंगे रफ्तार
अमृत भारत ट्रेनों में पुश-पुल तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें ट्रेन के आगे और पीछे दोनों तरफ इंजन लगाए जाते हैं। यानी एक ट्रेन को दो लोकोमोटिव रफ्तार देते हैं। इसी हिसाब से 166 अमृत भारत इंजन करीब 83 ट्रेनों के संचालन में इस्तेमाल किए जा सकेंगे।
पिछले वित्तीय वर्ष में BLW ने कुल 572 लोकोमोटिव बनाए थे। इनमें अमृत भारत ट्रेनों के लिए 14 इंजन शामिल थे। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में अकेले अमृत भारत के लिए 166 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बनाने का लक्ष्य है। BLW के कुल लक्षित इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव उत्पादन में इनकी हिस्सेदारी करीब 26 प्रतिशत होगी।
सामान्य इंजन से अलग होगा अमृत भारत का लोको
BLW में तैयार किए जा रहे अमृत भारत लोकोमोटिव में लोको पायलट की सुविधा के साथ इंजन की दक्षता और सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है। इंजन के फ्रंट हिस्से को एयरोडायनेमिक डिजाइन दिया गया है। इसका मकसद हवा के प्रतिरोध को कम करना और इंजन की कार्यक्षमता बेहतर करना है।
लोको पायलट के केबिन में भी कई बदलाव किए गए हैं। सामने की ओर बेहतर दृश्यता देने की कोशिश की गई है। बारिश के दौरान विजिबिलिटी बनाए रखने के लिए व्यू कटर जैसी सुविधा दी गई है। क्रू की सुविधा के लिए केबिन में 360 डिग्री घूमने वाली सीट और AC जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। मोबाइल और अन्य जरूरी छोटी वस्तुओं को रखने के लिए भी व्यवस्थित जगह बनाई गई है।
सुरक्षा पर भी खास जोर
BLW के जनसंपर्क अधिकारी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2026-27 में तैयार किए जा रहे नए लोकोमोटिव में सुरक्षा और क्रू-कम्फर्ट को प्राथमिकता दी जा रही है। इनमें कवच सिस्टम, एयरोडायनेमिक लुक-आउट स्क्रीन और क्रू-फ्रेंडली कैब जैसे बदलाव शामिल किए जा रहे हैं।
नए इंजनों पर भारत का झंडा भी लगाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह देश में तैयार किए जा रहे स्वदेशी लोकोमोटिव और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाता है।
डीजल इंजन बनाने वाले कर्मचारी अब बना रहे इलेक्ट्रिक लोको
BLW की एक खास उपलब्धि यह भी है कि यहां वर्षों तक डीजल इंजन तैयार करने वाले कर्मचारी और इंजीनियर अब इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के निर्माण में योगदान दे रहे हैं। तकनीक में बदलाव के साथ कर्मचारियों और इंजीनियरों को लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
अधिकारी के मुताबिक, BLW में करीब 5 हजार कर्मचारी, सुपरवाइजर और इंजीनियर काम करते हैं। इनमें करीब 300 महिला कर्मचारी शामिल हैं। तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र के माध्यम से कर्मचारियों को नई तकनीक और आधुनिक लोकोमोटिव के निर्माण के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
99 फीसदी से ज्यादा काम स्वदेशी तकनीक से
BLW में लोकोमोटिव निर्माण का बड़ा हिस्सा स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। अधिकारियों के मुताबिक, यहां 99 फीसदी से अधिक काम स्वदेशी तकनीक से किया जाता है। इंजन में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर पार्ट्स भी देश में ही तैयार किए जाते हैं।
हाइड्रोजन और सोलर लोको के लिए भी तैयार
भविष्य में हाइड्रोजन या सोलर पावर से चलने वाले लोकोमोटिव के निर्माण को लेकर अधिकारियों का कहना है कि BLW के अधिकारी, इंजीनियर और सुपरवाइजर नई तकनीक अपनाने के लिए तैयार हैं। रेलवे और रेल मंत्रालय की ओर से भविष्य में जो भी लक्ष्य दिया जाएगा, BLW उसे पूरा करने के लिए आवश्यक तकनीकी क्षमता विकसित करने और उत्पादन करने को तैयार रहेगा।
1956 में रखी गई थी नींव, अब तक 11 हजार इंजन तैयार
बनारस रेल इंजन कारखाने की नींव अप्रैल 1956 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने रखी थी। इसके बाद यहां रेल इंजनों के निर्माण का काम शुरू हुआ। 3 जनवरी 1964 को BLW में पहला डीजल लोकोमोटिव तैयार किया गया था।
दशकों तक डीजल इंजन निर्माण के लिए पहचान रखने वाले इस कारखाने ने 2017 के बाद इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव निर्माण की दिशा में बड़ा बदलाव किया। अब यहां आधुनिक इलेक्ट्रिक रेल इंजन तैयार किए जा रहे हैं। जनसंपर्क अधिकारी के मुताबिक, BLW में अब तक करीब 11 हजार रेल इंजनों का निर्माण किया जा चुका है। इनमें 3,200 से अधिक इलेक्ट्रिक रेल इंजन शामिल हैं।
11 देशों को 182 इंजन निर्यात कर चुका BLW
BLW की पहुंच सिर्फ भारतीय रेलवे तक सीमित नहीं है। कारखाने ने विदेशों में भी अपने लोकोमोटिव का निर्यात किया है। अधिकारियों के अनुसार, BLW अब तक 11 देशों को 182 रेल इंजन निर्यात कर चुका है। कारखाना अब ‘मेक इन इंडिया’ के साथ ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। अमृत भारत ट्रेनों के लिए इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का बढ़ता उत्पादन इसी विस्तार की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।