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काशी के समग्र विकास के लिए नगर निगम–बीएचयू की साझेदारी, 50 छात्रों को नगर निगम में इंटर्नशिप का अवसर
 

 

वाराणसी। काशी के सर्वांगीण विकास, पर्यावरणीय स्थिरता और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए नगर निगम और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) ने मिलकर कार्य करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल और बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी के बीच उच्च स्तरीय वार्ता हुई, जिसमें दोनों संस्थाओं के बीच एक औपचारिक समझौता (एमओयू) करने पर सहमति बनी।

इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण पहलू शैक्षणिक समन्वय है। इसके तहत प्रतिवर्ष विश्वविद्यालय के 50 छात्रों को नगर निगम में इंटर्नशिप का अवसर मिलेगा। इससे छात्रों को शहरी नियोजन, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सामाजिक उद्यमिता की बारीकियों को समझने का मौका मिलेगा।

बैठक में विश्वविद्यालय के बाहरी क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया गया। मालवीय गेट से डाफी कॉरिडोर तक सुंदरीकरण कार्य किया जाएगा, वहीं कंदवा क्षेत्र में जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए नई जल निकासी लाइन बिछाने को प्राथमिकता दी जाएगी।

इसके अलावा विश्वविद्यालय परिसर में स्वच्छता प्रबंधन और निराश्रित पशुओं के नियंत्रण के लिए नगर निगम अपनी सेवाएं उपलब्ध कराएगा। इससे परिसर में पढ़ने वाले हजारों छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी दोनों संस्थान मिलकर काम करेंगे। नगर निगम द्वारा डोमरी क्षेत्र में विकसित किए जा रहे शहर के सबसे बड़े मियावाकी अर्बन फॉरेस्ट की देखरेख में बीएचयू के वनस्पति वैज्ञानिक सहयोग करेंगे। वैज्ञानिकों की टीम समय-समय पर निरीक्षण कर पौधों के बेहतर विकास के लिए तकनीकी सुझाव और दिशा-निर्देश देगी।

इस पहल को काशी में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने और शहरी वनीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल देश के अन्य शहरों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

बैठक में संपत्ति कर विवाद का स्थायी समाधान भी निकाला गया। नगर निगम और बीएचयू के बीच लंबे समय से चल रहे इस गतिरोध को खत्म करते हुए निगम ने विश्वविद्यालय को कुछ पुरानी देनदारियों में रियायत दी है। इसके बदले बीएचयू ने शेष बकाया राशि को किस्तों में चुकाने पर सहमति जताई है।