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फिल्मों के जरिए सांस्कृतिक विरासत पर मंथन, INTACH की ‘विरासत फिल्म चर्चा’ में दिखाए गए क्लासिक सिनेमा के दृश्य

 

Varanasi : भारतीय सिनेमा के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक मूल्यों और ऐतिहासिक परंपराओं को समझने के उद्देश्य से इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) के वाराणसी चैप्टर की ओर से ‘विरासत फिल्म चर्चा’ कार्यक्रम का तीसरा सत्र आयोजित किया गया। ककरमत्ता स्थित लिटिल फ्लावर हाउस में हुए इस कार्यक्रम में क्लासिक फिल्मों के चुनिंदा दृश्यों के जरिए भारतीय समाज और संस्कृति के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।

अप्रैल 2026 में शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य सिनेमा को केवल मनोरंजन का माध्यम न मानकर सामाजिक इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को समझने के महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में प्रस्तुत करना है।

‘जय बाबा फेलूनाथ’ और ‘सुजाता’ के दृश्यों पर हुई चर्चा

कार्यक्रम में कर्नल संदीप शर्मा और निर्मल जोशी ने प्रसिद्ध फिल्मों ‘जय बाबा फेलूनाथ’ और ‘सुजाता’ के चुनिंदा दृश्य प्रदर्शित किए। इसके बाद फिल्मों की कहानी, पात्रों, संवादों और उनमें छिपे सामाजिक तथा सांस्कृतिक संदेशों पर विस्तार से चर्चा हुई।

वक्ताओं ने बताया कि पुरानी भारतीय फिल्में अपने समय की सामाजिक परिस्थितियों, जीवनशैली, मान्यताओं और परंपराओं को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इन फिल्मों में भारतीय समाज के बदलते स्वरूप और सांस्कृतिक मूल्यों की झलक देखने को मिलती है।

सिनेमा के जरिए नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने की पहल

INTACH वाराणसी चैप्टर की इस पहल का उद्देश्य फिल्म प्रेमियों और नई पीढ़ी को भारतीय सिनेमा की समृद्ध विरासत से परिचित कराना है। कार्यक्रम की रूपरेखा टूरिस्ट गाइड जेरेमी ओल्टमैन (Jeremy Oltmann) ने तैयार की है, जबकि इसके संचालन की जिम्मेदारी निर्मल जोशी निभा रहे हैं।

आयोजकों के अनुसार, फिल्मों के प्रदर्शन के साथ उनसे जुड़े सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर संवाद करना भी इस कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

दर्शकों ने पूछे सवाल, विशेषज्ञों ने दिए जवाब

फिल्मों के अंश प्रदर्शित किए जाने के बाद प्रतिभागियों के साथ संवाद सत्र आयोजित हुआ। इस दौरान दर्शकों ने फिल्मों की विषयवस्तु, सामाजिक संदेश और सांस्कृतिक संदर्भों से जुड़े सवाल पूछे। कर्नल संदीप शर्मा और निर्मल जोशी ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने फिल्मों के माध्यम से समाज की स्मृतियों और सांस्कृतिक पहचान को समझने के महत्व पर प्रकाश डाला।

BHU के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने साझा कीं पुरानी यादें

कार्यक्रम में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के कुलसचिव राजन श्रीवास्तव भी शामिल हुए। उन्होंने भारतीय सिनेमा से जुड़ी अपनी पुरानी यादें साझा कीं और इस पहल में रुचि दिखाई।

कार्यक्रम के संयोजक एवं INTACH वाराणसी चैप्टर के प्रतिनिधि अशोक कपूर ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और कुलसचिव राजन श्रीवास्तव की उपस्थिति के लिए विशेष आभार व्यक्त किया। राजन श्रीवास्तव ने इस सांस्कृतिक पहल में भविष्य में भी सहयोग देने का आश्वासन दिया।

हर दो महीने में ‘विरासत फिल्म चर्चा’ आयोजित करने की योजना

कार्यक्रम के समापन पर निर्मल जोशी ने अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि भविष्य में ‘विरासत फिल्म चर्चा’ का आयोजन प्रत्येक दो महीने में करने का प्रयास किया जाएगा।

INTACH वाराणसी चैप्टर के संयोजक अशोक कपूर ने भी कार्यक्रम को नियमित रूप से जारी रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से लोगों को भारतीय सिनेमा, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने का प्रयास जारी रहेगा।