काशी विद्यापीठ में विकसित यूपी के लक्ष्य पर मंथन, कुलपति बोले- कर्मशीलता और उद्यमिता ही विकास का आधार
Varanasi : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अर्थशास्त्र विभाग में शुक्रवार को उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा विद्यार्थियों में व्यावहारिक कौशल विकसित करने के उद्देश्य से एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। रामनगर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर चर्चा हुई।
समाज विज्ञान संकाय में आयोजित कार्यक्रम का विषय 'उद्योग-अकादमिक सहयोग एवं कौशल विकास द्वारा एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था/विकसित उत्तर प्रदेश' रहा। इस दौरान लघु उद्योग भारती, उत्तर प्रदेश के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लेकर भी बैठक हुई।
कर्मशीलता और उद्यमिता विकसित उत्तर प्रदेश का आधार—कुलपति
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि कर्मशीलता और उद्यमिता विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण का आधार हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को नवाचार और उद्यमशीलता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कुलपति ने युवाओं से स्टार्टअप योजनाओं का लाभ उठाने और अपने विचारों को व्यावहारिक रूप देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास के बल पर कोई भी व्यक्ति शून्य से शिखर तक का सफर तय कर सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों को केवल नौकरी प्राप्त करने तक सीमित न रहकर उद्यमिता और स्वरोजगार की संभावनाओं पर भी ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।
विद्यार्थियों को इंटर्नशिप और औद्योगिक भ्रमण में मिलेगा सहयोग
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं रामनगर इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष दयाशंकर मिश्र ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए परिश्रम और व्यावहारिक अनुभव के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को इंटर्नशिप और औद्योगिक भ्रमण के अवसर उपलब्ध कराने में सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई।
वहीं, लघु उद्योग भारती, उत्तर प्रदेश के प्रदेश सचिव राजेश कुमार सिंह और प्रदेश उपाध्यक्ष दीनानाथ बरनवाल ने विश्वविद्यालय के साथ कौशल विकास और उद्यमिता से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग का आश्वासन दिया।
लघु उद्योग भारती के साथ एमओयू को लेकर हुई बैठक
कार्यशाला के दौरान विश्वविद्यालय और लघु उद्योग भारती, उत्तर प्रदेश के बीच समझौता ज्ञापन को लेकर बैठक आयोजित की गई। इस पहल का उद्देश्य उद्योग जगत और विश्वविद्यालय के बीच दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं को विकसित करना है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों के लिए प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, कौशल विकास, उद्यमिता संवर्धन और रोजगारोन्मुख गतिविधियों के अवसर बढ़ाने पर चर्चा की गई।
हालांकि, कार्यक्रम में एमओयू को लेकर बैठक होने की जानकारी दी गई है। समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने की पुष्टि नहीं की गई है।
विश्वविद्यालय और उद्योग जगत के बीच समन्वय पर जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप विद्यार्थियों में कौशल विकसित करना समय की मांग है। शैक्षणिक संस्थानों और औद्योगिक संगठनों के बीच सहयोग से विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने और रोजगार के नए अवसरों को समझने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत संयोजक एवं अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. अंकिता गुप्ता ने किया। विषय प्रवर्तन सह-संयोजक प्रो. पारसनाथ मौर्य ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव प्रो. राकेश कुमार तिवारी ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर सह-आयोजन सचिव डॉ. गंगाधर सहित विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षक एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।