BRICS प्रतिनिधियों को भाया बनारस, कहा- ऐसा अनुभव कभी नहीं मिला
वाराणसी। ब्रिक्स देशों के संस्कृति कार्य समूह की बैठक में भाग लेने आए सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने शनिवार को अपने तीन दिवसीय प्रवास के अंतिम दिन काशी की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और हस्तशिल्प विरासत को करीब से देखा। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम, सारनाथ और दीनदयाल हस्तकला संकुल के भ्रमण के दौरान विदेशी मेहमान काशी की समृद्ध परंपराओं, कला और अध्यात्म से खासे प्रभावित नजर आए। भ्रमण के बाद प्रतिनिधिमंडल दोपहर में वाराणसी से रवाना हो गया, लेकिन काशी की यादें अपने साथ लेकर गया।
सारनाथ पहुंचकर बुद्ध की धरती पर हुए भावुक
विदेशी प्रतिनिधि शनिवार सुबह करीब साढ़े सात बजे सारनाथ पहुंचे। यहां उन्होंने प्राचीन मूलगंध कुटी विहार में दर्शन किए और ऐतिहासिक धमेख स्तूप की परिक्रमा की। अधिकारियों ने प्रतिनिधियों को भगवान बुद्ध के जीवन, उनके प्रथम उपदेश और सारनाथ के ऐतिहासिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने सारनाथ पुरातत्व संग्रहालय का भ्रमण किया।
संग्रहालय के मुख्य कक्ष में सुरक्षित अशोक स्तंभ को देखकर विदेशी मेहमान अभिभूत हो गए। उन्होंने धर्मचक्र मुद्रा में स्थापित भगवान बुद्ध की प्रतिमा समेत कई ऐतिहासिक पुरावशेषों का अवलोकन किया और तस्वीरें भी खिंचवाईं। ब्राजील के प्रतिनिधि यूकस और चीन के प्रतिनिधि हाय झिंग चांग ने कहा कि सारनाथ में उन्हें शांति और अध्यात्म का ऐसा अनुभव हुआ, जिसे वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगे।
बनारसी हस्तशिल्प की बारीकियों ने किया आकर्षित
सारनाथ भ्रमण के बाद प्रतिनिधिमंडल बड़ा लालपुर स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल पहुंचा। यहां विभिन्न पारंपरिक हस्तशिल्पों के लाइव डेमो ने विदेशी मेहमानों का ध्यान खींचा।
कारीगरों ने गुलाबी मीनाकारी, मूंज शिल्प, पत्थर की जाली कला, लकड़ी के खिलौने और निजामाबाद की प्रसिद्ध काली मिट्टी के बर्तनों के निर्माण की प्रक्रिया को लाइव प्रस्तुत किया। प्रतिनिधि बनारसी कारीगरों की कला और हुनर से बेहद प्रभावित दिखाई दिए। इस दौरान ईरान की एक प्रतिनिधि ने गुलाबी मीनाकारी से बनी इयर रिंग भी खरीदी।
गंगा आरती और बनारसी संस्कृति देख हुए मंत्रमुग्ध
हस्तकला संकुल के इमेजिंग जोन में विदेशी मेहमानों को आधुनिक प्रोजेक्टर तकनीक के माध्यम से काशी की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया गया। यहां उन्होंने गंगा आरती, बनारसी व्यंजन, लोक परंपराएं और काशी की सांस्कृतिक पहचान को ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति के माध्यम से देखा। इस प्रस्तुति ने विदेशी प्रतिनिधियों को काफी प्रभावित किया।
काष्ठ कला और GI टैग उत्पादों की खूब सराहना
म्यूजियम में प्रदर्शित काशी की प्रसिद्ध काष्ठ कला ने भी प्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया। कई मेहमानों ने लकड़ी से बने उत्पादों की तस्वीरें अपने मोबाइल फोन में कैद कीं। इसके बाद प्रतिनिधि जीआई (Geographical Indication) दीर्घा पहुंचे, जहां भारत के विभिन्न राज्यों के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों को प्रदर्शित किया गया था। विदेशी मेहमानों ने इन उत्पादों की विशेषताओं को समझा और उनकी सराहना की।
कालीन बुनाई का लाइव डेमो भी देखा
जीआई दीर्घा में प्रतिनिधियों ने कालीन बुनाई का लाइव प्रदर्शन भी देखा। इस दौरान उन्होंने बुनकरों से संवाद किया और कालीन निर्माण की बारीक तकनीकों के बारे में जानकारी हासिल की। विदेशी मेहमानों ने बुनकरों से कई सवाल पूछे और बनारस की पारंपरिक शिल्पकला को समझने में गहरी रुचि दिखाई।
विदाई में दिए गए खास उपहार
काशी भ्रमण के समापन पर विदेशी प्रतिनिधियों को जीआई टैग प्राप्त गुलाबी मीनाकारी से सजे मोर की आकृतियां और पारंपरिक लकड़ी के ब्लॉक प्रिंट से तैयार मोमयुक्त दीया-बत्ती सेट उपहार स्वरूप भेंट किए गए। इस दौरान दीनदयाल हस्तकला संकुल के क्षेत्रीय निदेशक वीरेंद्र कुमार, वरिष्ठ सहायक निदेशक (हस्तशिल्प) सरोज कुमार सिंह, सहायक निदेशक (हस्तशिल्प) प्रद्युमन पांडेय समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
काशी से लेकर गए संस्कृति और अध्यात्म की यादें
ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों के लिए यह भ्रमण केवल पर्यटन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और पारंपरिक शिल्पकला को करीब से समझने का अवसर साबित हुआ। काशी की आध्यात्मिक ऊर्जा, सारनाथ की शांति और बनारसी कारीगरों के हुनर ने विदेशी मेहमानों पर गहरी छाप छोड़ी।