BRICS प्रतिनिधियों को भाया बनारस का हुनर, TFC म्यूजियम में बनारसी साड़ी-बनारसी बुनाई और GI उत्पादों की जमकर सराहना
BRICS देशों के प्रतिनिधिमंडल ने वाराणसी के TFC म्यूजियम का दौरा कर बनारसी साड़ी, हथकरघा, कालीन, काष्ठ कला और GI उत्पादों का अवलोकन किया। प्रतिनिधि बनारस की संस्कृति, गंगा आरती और ओडीओपी उत्पादों से प्रभावित दिखे। ईरानी प्रतिनिधि ने गुलाबी मीनाकारी की ज्वेलरी भी खरीदी।
वाराणसी: ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार सुबह चांदमारी स्थित बड़ा लालपुर के ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर (TFC) म्यूजियम का भ्रमण किया। इस दौरान मेहमानों का पारंपरिक अंदाज में पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया और उन्हें उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) उत्पाद भेंट किए गए।
म्यूजियम पहुंचने के बाद प्रतिनिधियों ने प्रशासन की ओर से लगाए गए विभिन्न हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों के स्टॉल का अवलोकन किया। इस दौरान विदेशी मेहमानों ने स्थानीय कला और शिल्प के प्रति विशेष रुचि दिखाई।
ईरानी प्रतिनिधि ने खरीदी गुलाबी मीनाकारी की ज्वेलरी
दौरे के दौरान ईरान से आए एक प्रतिनिधि ने वाराणसी की प्रसिद्ध गुलाबी मीनाकारी कला से निर्मित एयर रिंग खरीदकर अपनी रुचि का परिचय दिया। उन्होंने करीब 1800 रुपये में यह उत्पाद खरीदा और स्थानीय शिल्पकारों की कला की सराहना की।
बनारसी साड़ी और हथकरघा की बारीकियों को समझा
प्रतिनिधिमंडल ने म्यूजियम में प्रदर्शित बनारसी ब्रोकेड, बनारसी साड़ी, हथकरघा उद्योग, कालीन बुनाई और पारंपरिक वस्त्र निर्माण की प्रक्रिया को नजदीक से देखा। अधिकारियों ने उन्हें बनारसी वस्त्रों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से भी अवगत कराया। विदेशी मेहमानों ने विशेष रुचि के साथ बनारसी बुनाई की तकनीकों और शिल्पकारों के कौशल के बारे में जानकारी प्राप्त की।
गंगा आरती और बनारसी संस्कृति ने किया आकर्षित
म्यूजियम के इमेजिंग जोन में प्रतिनिधियों को आधुनिक प्रोजेक्शन तकनीक के माध्यम से वाराणसी की पहचान से जुड़े विभिन्न दृश्य दिखाए गए। इसमें गंगा घाट, विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती, बनारसी खानपान, धार्मिक परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत शामिल थीं। श्रव्य-दृश्य प्रस्तुति देखकर प्रतिनिधि काफी उत्साहित नजर आए और उन्होंने बनारस की सांस्कृतिक विविधता की प्रशंसा की।
काष्ठ कला ने खींचा विदेशी मेहमानों का ध्यान
म्यूजियम में प्रदर्शित बनारस की पारंपरिक काष्ठ कला ने भी प्रतिनिधियों को प्रभावित किया। कई विदेशी मेहमानों ने इस कला की तस्वीरें अपने मोबाइल फोन में कैद कीं और इसकी विशेषताओं के बारे में जानकारी ली।
GI दीर्घा में देखे देशभर के अनूठे उत्पाद
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल संग्रहालय के तीसरे तल पर स्थित जीआई (Geographical Indication) दीर्घा पहुंचा। यहां उन्होंने भारत के विभिन्न राज्यों के जीआई टैग प्राप्त उत्पादों का अवलोकन किया और उनकी गुणवत्ता व विशिष्टता की सराहना की। म्यूजियम अधिकारियों ने प्रतिनिधियों को जीआई टैग के महत्व और इससे स्थानीय उत्पादों को मिलने वाली पहचान के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कालीन बुनाई का लाइव डेमो देख पूछे सवाल
दौरे के दौरान विदेशी मेहमानों ने कालीन बुनाई का लाइव प्रदर्शन भी देखा। प्रतिनिधियों ने बुनकरों से बातचीत कर कालीन निर्माण की प्रक्रिया, डिजाइन और तकनीकी पहलुओं को समझा। उन्होंने अपने मन में उठ रहे कई सवाल सीधे शिल्पकारों से पूछे और उनके जवाब भी जाने।
BRICS प्रतिनिधियों का यह दौरा न केवल वाराणसी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हस्तशिल्प को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर बना, बल्कि स्थानीय शिल्पकारों और GI उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।