दालमंडी में आज फिर चलेगा बुलडोजर, 5 जर्जर मकानों पर होगी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई
वाराणसी। काशी के दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना के तहत रविवार को पांच और जर्जर मकानों पर बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम ने इन भवनों को अति जर्जर घोषित करते हुए पहले ही नोटिस जारी कर दिया था। कार्रवाई से एक दिन पहले शनिवार को क्षेत्र में मुनादी कराकर लोगों को मकान खाली करने की सूचना भी दी गई।
अधिकारियों के अनुसार, ध्वस्तीकरण अभियान के लिए पोकलैंड मशीन और जेसीबी तैनात की गई हैं। अब तक दालमंडी क्षेत्र में 132 मकानों का अधिग्रहण और ध्वस्तीकरण शुरू किया जा चुका है, जिनमें से करीब 80 मकान पूरी तरह जमींदोज किए जा चुके हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद बनी स्थिति
दालमंडी परियोजना के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद कुछ मामलों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अदालत ने दो प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई करते हुए 20 जुलाई तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। ये भवन भी नगर निगम द्वारा जर्जर घोषित किए गए मकानों की श्रेणी में शामिल हैं।
200 पुलिसकर्मियों की तैनाती
ध्वस्तीकरण अभियान को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। क्षेत्र में पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और आरआरएफ के लगभग 200 जवान तैनात किए गए हैं। सुबह से ही बैरिकेडिंग कर कार्रवाई शुरू की जा रही है, जबकि रात में मलबा हटाने का कार्य जारी है।
इन भवनों पर होगी कार्रवाई
नगर निगम द्वारा जिन भवनों को अति जर्जर घोषित किया गया है, उनमें सीके-43/119, सीके-43/121, सीके-43/115, डी-50/216 और डी-50/250 शामिल हैं। प्रशासन ने भवन स्वामियों और स्थानीय लोगों से सहयोग करने की अपील की है।
क्या है दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काशी दौरे के दौरान दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना की आधारशिला रखी गई थी। इस परियोजना के तहत नई सड़क से चौक थाना तक लगभग 650 मीटर लंबी दालमंडी गली को 17.5 मीटर (करीब 60 फीट) चौड़ा किया जाना है।
परियोजना पर कुल 215.88 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें प्रभावित भवन और दुकान मालिकों को लगभग 191 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में दिए जाने हैं। अब तक करीब 65 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी नई दालमंडी
पीडब्ल्यूडी के अनुसार चौड़ीकरण के बाद यहां 30 फीट चौड़ी सड़क और दोनों ओर 15-15 फीट चौड़े फुटपाथ बनाए जाएंगे। बिजली, पानी और सीवर की सभी व्यवस्थाएं भूमिगत होंगी। इसके अलावा क्षेत्र में हरियाली, बैठने की व्यवस्था और वर्षा जल संचयन (वॉटर हार्वेस्टिंग) जैसी आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
अधिकारियों का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद दालमंडी क्षेत्र का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा और यह काशी के प्रमुख मॉडल मार्गों में शामिल होगा।