काशी दौरे पर चीनी राजदूत: भारत-चीन के सदियों पुराने रिश्तों और साझा सांस्कृतिक विरासत को किया याद
वाराणसी। वैश्विक तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच भारत और चीन के रिश्तों में नरमी के संकेत अब ज़मीन पर भी दिखाई देने लगे हैं। इसी कड़ी में चीन के राजदूत Xu Feihong ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का दौरा किया। चीन सरकार के शीर्ष अधिकारी का लंबे समय बाद काशी आगमन दोनों देशों के मजबूत होते कूटनीतिक संबंधों का अहम संकेत माना जा रहा है।
राजदूत जू फीहोंग ने अपने दौरे के दौरान Sarnath का भ्रमण किया, जो भारत-चीन के प्राचीन सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उन्होंने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सारनाथ वही स्थान है, जहां करीब 2500 वर्ष पहले भगवान बुद्ध ने पहला उपदेश दिया था और जहां चीनी यात्री Xuanzang (ह्वेनसांग) के पदचिह्नों ने बौद्ध धर्म को चीन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने Dhamek Stupa का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आज भी अडिग खड़ा है, ठीक उसी तरह जैसे भारत और चीन की सभ्यताओं के बीच संबंध कायम हैं। राजदूत ने सारनाथ की चार तस्वीरें भी साझा कीं और इसे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु बताया।
दौरे के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने राजदूत को सारनाथ के विभिन्न बौद्ध स्थलों की जानकारी दी। इस दौरान ह्वेनसांग की 7वीं शताब्दी में भारत यात्रा और Harshavardhana के शासनकाल के दौरान काशी आगमन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर भी चर्चा हुई।
इतिहास के अनुसार, ह्वेनसांग 630 से 644 ईस्वी के बीच भारत में रहे और उन्होंने सारनाथ का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने यहां स्थित मूलगंध कुटी विहार (वर्तमान मूलगंध कुटी मंदिर) का भी उल्लेख किया, जिसे भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश स्थल के रूप में जाना जाता है। यह स्थल आज भी बौद्ध अनुयायियों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है।
कुल मिलाकर, चीनी राजदूत का यह दौरा न सिर्फ सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव को दर्शाता है, बल्कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत-चीन संबंधों के नए अध्याय की ओर भी इशारा करता है।