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CHS प्रवेश विवाद गहराया: छात्र अनशन पर डटे, बोले- लिखित आश्वासन तक नहीं हटेंगे

BHU के सेंट्रल हिन्दू स्कूल में प्रवेश और सीट विवाद को लेकर छात्र 19 फरवरी से आमरण अनशन पर बैठे हैं। छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उनकी मांगों की अनदेखी कर रहा है। पारदर्शिता, सीट बहाली और लिखित आश्वासन की मांग को लेकर आंदोलन लगातार जारी है।

 

वाराणसी: संबद्ध सेंट्रल हिन्दू स्कूल (CHS) में प्रवेश और सीट आवंटन से जुड़ी समस्याओं को लेकर छात्रों का आमरण अनशन शुक्रवार को भी जारी रहा। 19 फरवरी से शुरू हुआ यह आंदोलन अब और तेज हो गया है। छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की अनदेखी और संवाद के अभाव के कारण उन्हें यह कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

छात्र नेता विपुल सिंह ने बताया कि छात्रों और अभिभावकों की समस्याओं को लेकर कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट, लिखित और न्यायसंगत समाधान नहीं दिया जाएगा, तब तक आमरण अनशन जारी रहेगा।

छात्रों ने आरोप लगाया कि धरना शुरू होने के 24 घंटे बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी वार्ता के लिए नहीं पहुंचा। इससे छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी और बढ़ गई है। छात्र नेता ने चेतावनी दी कि यदि अनशन के दौरान कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।

छात्रों का कहना है कि CHS की प्रवेश प्रक्रिया, सीट आवंटन और छात्राओं की सीटों में कटौती जैसे मुद्दों पर पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। उनका आरोप है कि प्रशासन छात्रों के हितों की अनदेखी कर रहा है, जिससे अभिभावकों में भी असंतोष बढ़ रहा है।

इसी बीच, छात्रों ने अपनी मांगों और आंदोलन की स्थिति को सार्वजनिक करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की घोषणा की है। इसमें छात्र प्रतिनिधियों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों के शामिल होने की संभावना है। छात्रों को उम्मीद है कि इस पहल के बाद प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा।

छात्रों की प्रमुख मांगों में CHS प्रवेश प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना, कक्षा 6 की लॉटरी प्रणाली की समीक्षा, कक्षा 9 में छात्राओं की सीटों की बहाली तथा प्रशासन द्वारा लिखित आश्वासन देना शामिल है। फिलहाल सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।