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काशी के ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ के नाम पर विवाद, सिंधी समाज ने की ‘सिंधु गंगेश्वर महादेव’ नाम रखने की मांग
 

 

वाराणसी। गंगा किनारे राजमंदिर क्षेत्र के छोटी शीतला घाट पर स्थित शिव मंदिर के नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर के बाहर ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ नाम का बोर्ड लगाए जाने पर सिंधी समाज ने आपत्ति जताई है। मंगलवार को समाज के प्रतिनिधियों ने नगर निगम अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच कराने और मंदिर का नाम ‘सिंधु गंगेश्वर महादेव’ किए जाने की मांग की।

सिंधी समाज का कहना है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग का इतिहास भारत-पाकिस्तान विभाजन से जुड़ा है। समाज के प्रतिनिधियों के अनुसार, विभाजन के समय उनके पूर्वज सिंध क्षेत्र से शिवलिंग को अपने साथ काशी लेकर आए थे। छोटी शीतला घाट पहुंचने के बाद शिवलिंग को गंगा में प्रवाहित करने की योजना थी, लेकिन स्थानीय लोगों के आग्रह पर इसे घाट पर ही स्थापित कर दिया गया और तभी से यहां पूजा-अर्चना की जा रही है।

‘नाम मंदिर के इतिहास और समाज से जुड़ा होना चाहिए’

सिंधी समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि मंदिर का नाम उसके इतिहास और सिंधी समाज से जुड़े संबंध को दर्शाने वाला होना चाहिए। समाज ने ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ नाम पर आपत्ति जताते हुए इसे बदलकर ‘सिंधु गंगेश्वर महादेव’ करने की मांग की है।

समाज का आरोप है कि हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने मंदिर को ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ के नाम से प्रचारित किया और इसके बाद इसी नाम का बोर्ड मंदिर के बाहर लगा दिया गया। प्रतिनिधियों का कहना है कि उनकी आपत्ति शिवलिंग या धार्मिक स्थल को लेकर नहीं, बल्कि नामकरण और बोर्ड लगाए जाने की प्रक्रिया को लेकर है।

नगर निगम से जांच और कार्रवाई की मांग

सिंधी समाज के प्रतिनिधियों ने नगर निगम प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में मांग की है कि यह पता लगाया जाए कि मंदिर के बाहर बोर्ड किसने और किसकी अनुमति से लगाया। यदि बोर्ड बिना अनुमति लगाया गया है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

समाज के प्रतिनिधि शंकर ने नगर निगम से पहल कर मंदिर के बाहर सही नाम का बोर्ड लगवाने की मांग की। साथ ही नगर निगम की कार्यकारिणी के समक्ष मंदिर का नाम ‘सिंधु गंगेश्वर महादेव’ किए जाने का प्रस्ताव रखने की बात कही गई है।

पहले भी ‘पाकिस्तानी महादेव’ नाम से होती रही है चर्चा

मंदिर को ‘पाकिस्तानी महादेव’ नाम से संबोधित किए जाने का उल्लेख पुरानी मीडिया रिपोर्टों में भी मिलता है। जुलाई 2024 की एक रिपोर्ट में शिवलिंग को भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान काशी लाए जाने और स्थानीय लोगों के कहने पर शीतला घाट पर स्थापित किए जाने का उल्लेख है।

हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर पर ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ नाम का फ्लेक्स बोर्ड लगाए जाने को लेकर शिकायत पुलिस तक भी पहुंच चुकी है। मामले की जांच की मांग की गई है।

फिलहाल सिंधी समाज ने नगर निगम से नामकरण से जुड़े तथ्यों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने और मंदिर के ऐतिहासिक संबंध को ध्यान में रखते हुए नया नाम तय करने की मांग की है।