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वाराणसी में पुलिस पहरे के बीच दालमंडी पहुंचे सपा नेता, बोले- पीड़ितों की आवाज दबा रही सरकार

वाराणसी के दालमंडी में ध्वस्तीकरण के बाद सपा नेताओं ने कड़े पुलिस बंदोबस्त के बावजूद इलाके में पहुंचकर पीड़ितों से मिलने की कोशिश की। प्रशासन ने अनुमति नहीं दी और कई नेताओं को हाउस अरेस्ट किया। सपा ने इसे तानाशाही बताते हुए सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया।

 

वाराणसी: दालमंडी क्षेत्र में ध्वस्तीकरण के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। पुलिस के कड़े बंदोबस्त और निगरानी के बावजूद समाजवादी पार्टी के कई पदाधिकारी पुलिस को चकमा देकर दालमंडी पहुंच गए। इनमें किशन दीक्षित, लालू यादव, राहुल यादव समेत अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे।

प्रशासन को पहले से सपा प्रतिनिधिमंडल के दौरे की जानकारी थी, जिसके चलते पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और कई नेताओं को हाउस अरेस्ट किया गया है। इसके बावजूद कुछ नेता दालमंडी पहुंचने में सफल रहे।

ध्वस्तीकरण से प्रभावित लोगों से मिलने का था कार्यक्रम

दालमंडी में हाल ही में हुए ध्वस्तीकरण के बाद वहां के स्थानीय दुकानदार और परिवार प्रभावित हुए हैं। उनके हालात जानने और के लिए सपा का प्रतिनिधिमंडल वाराणसी पहुंचा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष शिक्षक एमएलसी लाल बिहारी यादव ने 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल नामित किया है, जिसे दालमंडी चौड़ीकरण में प्रभावित होने वालों से मुलाकात कर रिपोर्ट सौंपनी है।


प्रशासन ने नहीं दी अनुमति, कई नेता किए गए नजरबंद

पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए दालमंडी जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। स्थिति को देखते हुए कई सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को रात से ही हाउस अरेस्ट कर दिया गया था। प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र में संवेदनशील स्थिति को देखते हुए किसी भी राजनीतिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी गई है।


सपा ने सरकार पर लगाया तानाशाही का आरोप

सपा के जिला अध्यक्ष सुजीत यादव लक्कड़ ने प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि सरकार प्रभावित परिवारों की आवाज दबाने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि दालमंडी में दुकानों और मकानों को तोड़ा जा रहा है और पीड़ितों से मिलने तक नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के खिलाफ है और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।