एक सफर में काशी विश्वनाथ से जगन्नाथ धाम तक दर्शन, UP-ओडिशा मिलकर बनाएंगे स्पिरिचुअल टूरिज्म सर्किट
वाराणसी। देश के धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने की तैयारी है। भगवान शिव की नगरी काशी और भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी को एक बड़े स्पिरिचुअल टूरिज्म सर्किट के रूप में विकसित करने की योजना पर उत्तर प्रदेश और ओडिशा ने कदम बढ़ाया है। दोनों राज्यों के पर्यटन और संस्कृति विभागों की सहभागिता से आयोजित तीन दिवसीय संयुक्त पर्यटन सम्मेलन में काशी-पुरी के बीच बेहतर कनेक्टिविटी और संयुक्त टूर पैकेज को लेकर रणनीति तैयार की गई।
ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रवती परिदा ने कहा कि राज्य कनेक्टिविटी के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। फिलहाल काशी से पुरी के लिए एक फ्लाइट और कई ट्रेनें उपलब्ध हैं। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर केंद्र सरकार और रेलवे से संपर्क कर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
काशी-पुरी पैकेज से बढ़ेगा पर्यटकों का ठहराव
प्रस्तावित योजना के तहत टूर ऑपरेटरों के लिए काशी-पुरी कंबाइंड टूर पैकेज तैयार किया जाएगा। इसका मकसद सिर्फ काशी और पुरी के प्रमुख मंदिरों तक पर्यटकों को पहुंचाना नहीं, बल्कि दोनों राज्यों के धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को एक ही यात्रा से जोड़ना है।
पुरी आने वाले पर्यटकों को जगन्नाथ मंदिर के साथ कोणार्क सूर्य मंदिर, रत्नागिरी, उदयगिरि और ललितगिरि के बौद्ध विरासत स्थलों के अलावा चिल्का, भीतर्कनिका और सिमिलिपाल जैसे प्राकृतिक एवं वन्यजीव पर्यटन स्थलों से भी जोड़ने की तैयारी है। इससे पर्यटकों के रुकने की अवधि बढ़ने और स्थानीय कारोबार को फायदा मिलने की उम्मीद है।
पर्यटकों की संख्या में 25 से 30% तक बढ़ोतरी का अनुमान
पर्यटन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस कनेक्टिविटी और संयुक्त पर्यटन पैकेज से दोनों राज्यों में पर्यटकों की संख्या में 25 से 30 प्रतिशत तक वार्षिक वृद्धि की संभावना है। वाराणसी और भुवनेश्वर-पुरी क्षेत्र में होटल, होमस्टे और अन्य हॉस्पिटैलिटी सेवाओं को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
काशी आने वाले पर्यटक जहां ओडिशा की संस्कृति और समुद्र तटों का रुख कर सकते हैं, वहीं पुरी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए काशी एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पड़ाव बन सकती है।
बनारसी साड़ी से पट्टचित्र तक को मिलेगा बाजार
इस पहल का असर सिर्फ पर्यटन तक सीमित नहीं रहेगा। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होटल, परिवहन, स्थानीय गाइड, खानपान और हस्तशिल्प कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
वाराणसी की बनारसी साड़ी, लकड़ी और अन्य स्थानीय हस्तशिल्प के साथ ओडिशा की प्रसिद्ध पट्टचित्र कला और हैंडीक्राफ्ट को भी नया बाजार मिल सकता है। स्थानीय व्यंजनों और धार्मिक प्रसाद से जुड़े कारोबार को भी इसका फायदा मिलने की संभावना है।
धार्मिक स्थलों से आगे सांस्कृतिक जुड़ाव
काशी-पुरी सर्किट की सबसे खास बात यह होगी कि यह सिर्फ दो धार्मिक शहरों को जोड़ने की योजना नहीं है, बल्कि उत्तर और पूर्वी भारत की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को एक साझा पर्यटन मार्ग में पिरोने की कोशिश है।
अगर योजना को बेहतर कनेक्टिविटी और आकर्षक टूर पैकेज के साथ लागू किया जाता है, तो काशी से महाप्रभु जगन्नाथ तक का यह सफर आने वाले समय में देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन सर्किट में शामिल हो सकता है। साथ ही इससे दोनों राज्यों के पर्यटन, स्थानीय रोजगार और छोटे कारोबार को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।