{"vars":{"id": "130921:5012"}}

काशी के सुरों को डाक विभाग का सलाम, बनारस घराने के महान उस्तादों पर जारी हुआ विशेष पोस्टकार्ड सेट
 

 

वाराणसी। उत्तर प्रदेश पोस्टल सर्किल और पोस्टक्रॉसिंग वेलफेयर सोसाइटी ऑफ इंडिया की संयुक्त पहल पर सोमवार को वाराणसी के प्रधान डाकघर में बनारस घराने के महान संगीताचार्यों को समर्पित लिमिटेड एडिशन चित्रात्मक पोस्टकार्ड सेट का भव्य विमोचन किया गया। कार्यक्रम के दौरान काशी की समृद्ध संगीत विरासत को समर्पित एक विशेष स्मारक कैंसिलेशन (Special Cancellation) भी जारी किया गया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश पोस्टल सर्किल की पोस्टमास्टर जनरल पद्मगंधा मिश्रा (IPoS) रहीं, जबकि उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक एवं पोस्टक्रॉसिंग वेलफेयर सोसाइटी ऑफ इंडिया के चीफ पैट्रन डॉ. राजेंद्र पाल सिंह (IPS) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

डॉ. राजेंद्र पाल सिंह ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य फिलाटेली (डाक टिकट एवं पोस्टकार्ड संग्रह) को बढ़ावा देने के साथ-साथ बनारस घराने की विश्वविख्यात संगीत परंपरा को देश और विदेश तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि पहले चरण में जिन पांच महान विभूतियों पर विशेष पोस्टकार्ड जारी किए गए हैं, उनमें भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पद्म विभूषण पंडित राजन मिश्र, ठुमरी सम्राज्ञी विदुषी सिद्धेश्वरी देवी, तबला सम्राट पंडित किशन महाराज और पद्म विभूषण विदुषी गिरिजा देवी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में बनारस घराने के अन्य महान कलाकारों को भी इस श्रृंखला में शामिल किया जाएगा।

पोस्टक्रॉसिंग वेलफेयर सोसाइटी ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि सेवानिवृत्त कर्नल अखिल कुमार ने बताया कि संस्था का उद्देश्य भारत की संस्कृति, सभ्यता और विरासत को दुनिया भर तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि ये विशेष पोस्टकार्ड "भारत के सांस्कृतिक राजदूत" के रूप में काशी की संगीत परंपरा का संदेश वैश्विक स्तर तक पहुंचाएंगे।

उन्होंने बताया कि इस अवसर पर जारी विशेष स्मारक कैंसिलेशन की डिजाइन भगवान शिव के डमरू, शंख और मां गंगा की लहरों से प्रेरित है, जो काशी की आध्यात्मिक एवं सांगीतिक विरासत का प्रतीक है।

कर्नल अखिल कुमार ने जानकारी दी कि इस लिमिटेड एडिशन श्रृंखला के केवल 550 सेट तैयार किए गए हैं। इनमें से 200 सेट विदेशों में भेजे जाएंगे, जबकि 350 सेट देशभर के फिलाटेली प्रेमियों और संग्रहकर्ताओं के लिए उपलब्ध रहेंगे। इस पहल का उद्देश्य काशी की अमूल्य संगीत धरोहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का प्रचार-प्रसार करना है।