जल जीवन मिशन की योजनाओं पर मंडलायुक्त सख्त, छह महीने में सभी वार्डों के कार्य पूरे करने की दी डेडलाइन
वाराणसी। पेयजल, सीवरेज और नमामि गंगे से जुड़ी परियोजनाओं को समयसीमा के भीतर पूरा कराने के लिए प्रशासन ने अब काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को मंडलायुक्त एस. राजलिंगम की अध्यक्षता में हुई बैठक में जल जीवन मिशन और नमामि गंगे से संबंधित परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के प्रबंध निदेशक मासूम अली सरवर, उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक योगेश कुमार, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल समेत जल निगम और अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
नगरीय क्षेत्र में चल रहे पेयजल, सीवरेज और नमामि गंगे के कार्यों की समीक्षा करते हुए मंडलायुक्त ने वाराणसी नगर के सभी वार्डों में चल रहे कार्यों को अगले छह महीने के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने काम की गति बढ़ाने के लिए प्रत्येक वार्ड में कम से कम 90 से 100 मैनपावर की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही अधिकारियों को मौके पर नियमित निगरानी रखने और तय समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण काम पूरा कराने के निर्देश दिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की योजनाओं की प्रगति भी बैठक का प्रमुख मुद्दा रही। मंडलायुक्त ने 90 प्रतिशत से अधिक पूरी हो चुकी योजनाओं को दिसंबर 2026, 50 प्रतिशत से अधिक पूर्णता वाली योजनाओं को जनवरी 2027 और 50 प्रतिशत पूर्णता वाली योजनाओं को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया। बाकी योजनाओं में भी काम की रफ्तार बढ़ाकर प्राथमिकता के आधार पर उन्हें पूरा कराने को कहा गया।
बैठक में ग्रामीण इलाकों में लंबित रोड रेस्टोरेशन के कामों पर भी नाराजगी जताते हुए तेजी लाने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को बरसात खत्म होने के बाद अक्टूबर में कार्ययोजना तैयार करने और सभी लंबित सड़क बहाली के कार्यों को दो महीने के भीतर पूरा कराने को कहा गया। मंडलायुक्त ने स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी फील्ड में नियमित निरीक्षण करें और काम की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें।
मंडलायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं का तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा में पूरी हों और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता न किया जाए।