चिता भस्म की होली पर डोमराज परिवार का फूटा गुस्सा: श्मशान में नशा, रील और उपद्रव पर रोक लगाओ
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चिता भस्म होली को लेकर डोमराजा विश्वनाथ चौधरी ने प्रशासन को पत्र लिखकर रोक की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोजन के दौरान शराब, अभद्रता और रील बनाने से श्मशान की गरिमा भंग हो रही है और शव यात्रियों को परेशानी हो रही है।
वाराणसी: मणिकर्णिका घाट पर आयोजित होने वाली चिता भस्म की होली को लेकर अब विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। डोमराजा परिवार के सदस्य विश्वनाथ चौधरी ने इस आयोजन को लेकर प्रशासन को प्रार्थना पत्र सौंपते हुए आपत्ति जताई है और इसे तत्काल रोकने की मांग की है।
श्मशान की गरिमा हो रही भंग
विश्वनाथ चौधरी ने अपने प्रार्थना पत्र में कहा कि पिछले कुछ वर्षों से चिता भस्म की होली के नाम पर स्वघोषित आयोजन किया जा रहा है, जिससे उन्हें गहरा आघात पहुंचा है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन अब मसाननाथ मंदिर के बाहर तक फैल गया है और इसमें भारी उपद्रव और उत्पात होने लगा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस कारण श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं, जिससे मृतकों के परिजनों को अत्यधिक पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है।
शराब, अभद्रता और रील बनाना आम बात
डोमराजा ने आरोप लगाया कि इस स्वघोषित आयोजन के दौरान कई लोग शराब के नशे में श्मशान पहुंचते हैं और मृत शवों व शव यात्रियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के साथ चिता और शवों के पास रील बनाते हैं, जो न केवल अनैतिक बल्कि अधार्मिक भी है। उन्होंने इसे श्मशान की गरिमा और धार्मिक परंपराओं के खिलाफ बताया।
जिसका शव होता है, वही पीड़ा समझ सकता है
विश्वनाथ चौधरी ने कहा कि जिस परिवार का सदस्य मृत होता है, उसकी पीड़ा को वही समझ सकता है। ऐसे संवेदनशील माहौल में इस तरह के आयोजन से शोकाकुल परिवारों की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के कृत्य काशी की पवित्र परंपरा और धार्मिक मर्यादा के खिलाफ हैं।
प्रशासन से लगाई रोक की गुहार
डोमराजा ने प्रशासन से मांग की है कि चिता जलाने वाले स्थान पर इस तरह के आयोजनों की अनुमति न दी जाए। उन्होंने इसे पूर्ण रूप से धर्म विरोधी बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि श्मशान घाट की शांति और गरिमा भंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और काशी की पवित्र भूमि को इस तरह के अधार्मिक कृत्यों से मुक्त कराया जाए। उन्होंने अपने प्रार्थना पत्र में प्रशासन से इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र समाधान करने की अपील की है।