नकली कफ सिरप मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, शुभम जायसवाल-दिवेश जायसवाल के घर छापा
वाराणसी में ईडी ने कोडीन युक्त कफ सिरप सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 25 ठिकानों पर छापेमारी की। सरगना शुभम जायसवाल, उसके सीए और फर्जी फर्मों से जुड़े दस्तावेज जब्त हुए। जांच में 100 करोड़ रुपये की अवैध खरीद-बिक्री और 93 फर्जी मेडिकल स्टोरों का नेटवर्क उजागर हुआ।
वाराणसी: वाराणसी में शुक्रवार की सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कफ सिरप कांड से जुड़े बड़े सिंडिकेट पर एक साथ कार्रवाई शुरू की। ईडी की टीम ने वाराणसी समेत देशभर के 25 ठिकानों पर छापेमारी की, जिनमें लखनऊ, अहमदाबाद, जौनपुर, सहारनपुर और रांची शामिल हैं।
वाराणसी में सरगना शुभम जायसवाल, उसके चार्टर्ड अकाउंटेंट और करीब छह स्थानों पर छापे मारे गए। ईडी ने आदमपुर थाना क्षेत्र स्थित शुभम के पैतृक घर, बादशाह बाग कॉलोनी स्थित नए मकान और दुकान पर जांच की। वहीं, गिरोह की एक और अहम कड़ी खोजवा निवासी दिवेश जायसवाल के दो मंजिला मकान सहित कई ठिकानों पर भी कार्रवाई की गई।
कोतवाली थाने में नामजद फर्जी फर्मों के यहां ईडी की अलग-अलग टीमें पहुंचीं और फर्मों का भौतिक सत्यापन किया। शुरुआती जांच में सामने आया कि कई फर्में कागज़ों पर तो मौजूद थीं, लेकिन मौके पर नहीं मिलीं।
CA विष्णु कुमार का दफ्तर सील
ईडी की टीम ने शुभम जायसवाल के सीए विष्णु कुमार अग्रवाल के दफ्तर पर भी छापा मारा। छापा शुरू होते ही सीए फरार हो गया और ईडी ने उसके दफ्तर को सील कर दिया। टीम को ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि कफ सिरप के अवैध कारोबार से जुड़े वित्तीय लेनदेन को यही CA मैनेज करता था।
100 करोड़ का अवैध कारोबार
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह ने 89 लाख शीशी प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप की खरीद-फरोख्त की, जिसकी क़ीमत लगभग 100 करोड़ रुपये बताई जा रही है। काशी के 93 मेडिकल स्टोर के नाम पर सिरप खरीदा-बेचा गया, लेकिन जांच में ज्यादातर स्टोर फर्जी पाए गए।
फर्जी फर्मों की सूची
नेटवर्क बंगाल और बांग्लादेश तक
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की जांच में खुलासा हुआ कि यह नेटवर्क वाराणसी से शुरू होकर बंगाल और बांग्लादेश तक फैला था। सिर्फ कोडीन युक्त सिरप की अवैध बिक्री के लिए ही फर्जी फर्में बनाई गई थीं।
कई जिलों में मुकदमे
शुभम जायसवाल के खिलाफ सोनभद्र, जौनपुर, गाजियाबाद, चंदौली और वाराणसी के कई थानों में केस दर्ज हैं। ईडी अब इस पूरे नेटवर्क की फंडिंग और सप्लाई चेन का विश्लेषण कर रही है।