आस्था बरकरार, लेकिन सावन में क्यों आधी रह गई काशी विश्वनाथ धाम की भीड़? सुविधाओं पर उठे सवाल
वाराणसी। सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए विशेष माना जाता है। हर साल सावन में श्री काशी विश्वनाथ धाम में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, लेकिन इस बार मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में कम नजर आ रही है। मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, सावन के 19 दिनों में अब तक 53,69,634 श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन किए हैं।
बीते सोमवार को नागपंचमी और सावन सोमवार का विशेष संयोग होने के बावजूद श्रद्धालुओं की संख्या कोई नया रिकॉर्ड नहीं बना सकी। हालांकि मंदिर प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है और सावन के शेष नौ दिनों में दर्शनार्थियों की संख्या करीब 80 लाख तक पहुंचने का अनुमान है।
सोमवार को पहुंच रहे औसतन 5.5 लाख श्रद्धालु
मंदिर प्रशासन के अनुसार सावन के प्रत्येक सोमवार को औसतन करीब 5.5 लाख श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दरबार में पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, प्रसाद और चिकित्सा जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। दर्शन व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए प्रोटोकॉल और टिकट की व्यवस्था भी लागू है।
हालांकि, श्रद्धालुओं की ओर से लंबी कतार, गर्मी में पैदल चलने और दर्शन तक पहुंचने में लगने वाले समय को लेकर लगातार चुनौतियां सामने आती रही हैं। खासकर बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए लंबी दूरी तय करना परेशानी का कारण बनता है।
कॉरिडोर बनने के बाद बढ़ी थी श्रद्धालुओं की संख्या
काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर बनने के बाद मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला था। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए काशी पहुंचने लगे। तमिल संगमम जैसे आयोजनों ने भी दक्षिण भारत से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाने में भूमिका निभाई।
इसके अलावा प्रयागराज महाकुंभ के दौरान भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु काशी पहुंचे और बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए। ऐसे में एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है, जो हाल के वर्षों में पहले ही काशी विश्वनाथ धाम का दर्शन कर चुका है। माना जा रहा है कि लगातार बढ़ती भीड़ और दर्शन की चुनौतियों के कारण कुछ श्रद्धालु दोबारा काशी आने को लेकर विचार कर रहे हैं।
सुविधाओं को लेकर उठ रहे सवाल
धाम में व्यवस्थाओं को लेकर मंदिर प्रशासन की ओर से लगातार सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर श्रद्धालुओं की कुछ परेशानियां भी सामने आती रही हैं। बुजुर्गों और बच्चों के साथ आने वाले परिवारों को लंबी दूरी तक पैदल चलना, कतार में इंतजार करना और गर्मी के बीच दर्शन करना चुनौतीपूर्ण लगता है।
इसके अलावा काशी में ठहरने की बढ़ती लागत, स्थानीय स्तर पर कारोबारियों के व्यवहार और सुरक्षा व्यवस्था की सख्ती को लेकर भी कुछ श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिलती है। बाबा के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को यदि यात्रा के दौरान लगातार असुविधाओं का सामना करना पड़े तो परिवार के साथ दोबारा काशी आने का फैसला प्रभावित हो सकता है।
आस्था में कमी नहीं, लेकिन अनुभव बना चुनौती
काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या भले ही पिछले वर्षों की तुलना में कम दिखाई दे रही हो, लेकिन 19 दिनों में 53 लाख से अधिक श्रद्धालुओं का पहुंचना अपने आप में बड़ी संख्या है। यह आंकड़ा बताता है कि बाबा विश्वनाथ के प्रति लोगों की आस्था आज भी मजबूत है।
अब सवाल यह है कि आने वाले वर्षों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उनके दर्शन अनुभव को कितना बेहतर बनाया जा सकता है। लंबी कतार, गर्मी, पैदल दूरी, ठहरने और स्थानीय सुविधाओं से जुड़ी चुनौतियों का समाधान किया जाता है तो काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था को और मजबूती मिल सकती है।