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दहेज उत्पीड़न मामले में पति समेत पांच आरोपित बरी, साक्ष्य के अभाव में कोर्ट का फैसला

 

वाराणसी। दहेज में पांच लाख रुपये की मांग को लेकर विवाहिता से मारपीट और प्रताड़ना के आरोपों में फंसे पति समेत पांच लोगों को अदालत से बड़ी राहत मिली है। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कृष्ण कुमार की अदालत ने आरोप सिद्ध न होने पर सभी आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।

अदालत से बरी किए गए आरोपितों में पति राजेश शर्मा, सास माया शर्मा, पल्लवी शर्मा, सोनी शर्मा उर्फ एकता झा और आरती झा शामिल हैं। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव, बृजपाल सिंह यादव उर्फ गुड्डू, नरेश यादव और संदीप यादव ने पैरवी की।

अभियोजन के अनुसार, वादिनी निधि शर्मा ने 19 मई 2022 को चौक थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि उसका विवाह 24 जून 2021 को सुनील शर्मा के साथ हुआ था। शादी में पिता ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-दहेज दिया था, लेकिन विवाह के बाद ससुराल पहुंचते ही उसे कम दहेज लाने को लेकर ताने दिए जाने लगे।

आरोप था कि पति और ससुराल के अन्य सदस्य उससे पांच लाख रुपये अतिरिक्त दहेज की मांग करते थे। मांग पूरी न होने पर उसके साथ मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी जाती थी। पीड़िता का कहना था कि 26 अप्रैल 2022 को उसका पति उसे मायके छोड़ गया, जिसके बाद उसने पुलिस कमिश्नर वाराणसी को प्रार्थनापत्र दिया था। निर्देश मिलने पर चौक पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज किया।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन आरोपों को ठोस साक्ष्यों से साबित नहीं कर सका। इस पर अदालत ने सभी आरोपितों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। वहीं, विचारण के दौरान एक अन्य आरोपित कुसुम शर्मा की मृत्यु हो जाने के कारण उसके खिलाफ कार्यवाही पहले ही समाप्त कर दी गई थी।