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करतालिया बाबा आश्रम के पूर्व महंत कौशल किशोर दास पंचतत्व में विलीन, हरिश्चंद्र घाट पर दी गई जल समाधि

 

वाराणसी। नगवा स्थित करतालिया बाबा आश्रम के पूर्व महंत एवं वैष्णव संत समाज के वरिष्ठ संत महंत कौशल किशोर दास बुधवार तड़के ब्रह्मलीन हो गए। उनके निधन का समाचार मिलते ही काशी सहित अयोध्या के संत समाज और श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई। लंबे समय तक धर्म, अध्यात्म और संत परंपरा की सेवा में समर्पित रहे महंत कौशल किशोर दास के निधन को संत समाज ने अपूरणीय क्षति बताया है।

बुधवार दोपहर उनका अंतिम संस्कार वाराणसी के हरिश्चंद्र घाट पर संत परंपरा के अनुसार धार्मिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। वैष्णव परंपरा का पालन करते हुए उन्हें जल समाधि दी गई। इस दौरान बड़ी संख्या में संत-महात्मा, शिष्य, अनुयायी और श्रद्धालु उपस्थित रहे। हरिश्चंद्र घाट पर श्रद्धा, भक्ति और भावुकता का वातावरण देखने को मिला।

महंत कौशल किशोर दास वैष्णव संत समाज के प्रमुख संतों में गिने जाते थे। वे वैष्णव विरक्त संत समाज के पूर्व अध्यक्ष भी रहे और उन्होंने अपने जीवनकाल में धर्म प्रचार, आध्यात्मिक जागरण तथा संत परंपरा के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

अंतिम विदाई के अवसर पर अयोध्या करतालिया आश्रम के महंत रामदास जी, उत्तराधिकारी महंत हरिशंकर दास, महंत महावीर दास, मदन दास, महान संत दास, गोविंद दास जी सहित अनेक संत-महात्मा मौजूद रहे। वहीं काशी संत समाज के सचिव महंत डॉ. श्रवण दास, कोतवाल मोहन दास, भगवान वेदांताचार्य, विजय दास और अन्य संतों ने भी अंतिम दर्शन कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

श्रद्धालुओं ने अपने प्रिय संत को नम आंखों से अंतिम विदाई दी और उनकी आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना की। संतों ने कहा कि महंत कौशल किशोर दास जी का पूरा जीवन सेवा, सादगी, आध्यात्मिक साधना और समाज कल्याण के लिए समर्पित रहा। उनके आदर्श और संस्कार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।

महंत कौशल किशोर दास जी के ब्रह्मलीन होने से नगवा स्थित करतालिया बाबा आश्रम, अयोध्या और काशी के संत समाज में गहरा शोक व्याप्त है। संतों का कहना है कि उनके दिखाए मार्ग पर चलना और उनके द्वारा स्थापित धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।