सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र प्रो. रमाकांत पांडेय बने उत्तराखंड विश्वविद्यालय के नए कुलपति
वाराणसी। सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के गौरवपूर्ण पूर्व छात्र प्रो. रमाकांत पांडेय को उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार का कुलपति नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति उत्तराखंड के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) द्वारा की गई है। आदेश हाल ही में जारी किए गए हैं और प्रो. पांडेय को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष के लिए यह पद सौंपा गया है। यह नियुक्ति उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत हुई है।
प्रो. रमाकांत पांडेय एक विख्यात संस्कृत विद्वान, शोधकर्ता और शिक्षाविद् हैं। उनका जन्म 2 फरवरी 1965 को हुआ था। उन्होंने सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से ही शास्त्री, आचार्य, एम.ए. (संस्कृत), पीएचडी और डी.लिट्. जैसी उच्च उपाधियां प्राप्त की हैं। वर्तमान में वे केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर के निदेशक पद पर कार्यरत थे।
उनके पास संस्कृत शिक्षण और अनुसंधान में 31 वर्षों से अधिक का अनुभव है, जिसमें 14 वर्षों से ज्यादा समय प्रोफेसर के रूप में बीता है। उन्होंने केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में भी प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दीं। संस्कृत साहित्य, व्याकरण और भारतीय संस्कृति पर उनके गहन शोध कार्य प्रसिद्ध हैं।
प्रो. पांडेय के साहित्यिक योगदान उल्लेखनीय हैं। अब तक उनकी 65 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, साथ ही 150 से अधिक शोधपत्र और 22 साहित्यिक लेख उनके नाम से प्रकाशित हैं। वे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में विषय विशेषज्ञ के रूप में भाग ले चुके हैं और 57 से अधिक शैक्षणिक कार्यशालाओं का आयोजन किया है। उनके योगदान के लिए 14 राज्यस्तरीय एवं राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।
कुलपति नियुक्ति पर प्रो. पांडेय ने कहा कि संस्कृत भारत की आत्मा है और भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल आधारशिला। उनका संकल्प है कि संस्कृत को जन-भाषा बनाया जाए, ताकि समाज में अनुशासन, सद्भाव और मानवता के मूल्यों को मजबूती मिले। उन्होंने संस्कृत के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन पर जोर दिया।
सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में इस उपलब्धि पर हर्ष का माहौल है। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा सहित कई आचार्यों ने प्रो. पांडेय को बधाई दी और उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की।
प्रो. पांडेय की नियुक्ति से उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में संस्कृत शिक्षा, शोध और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रचार-प्रसार को नई गति मिलने की उम्मीद है। उनके अनुभव से विश्वविद्यालय का शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक वातावरण और समृद्ध होने की संभावना जताई जा रही है।