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IMS BHU में MBBS बैच 2026 का फाउंडेशन कोर्स संपन्न, कुलपति बोले- मेडिकल शिक्षा का विकल्प नहीं बन सकता AI
 

 

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस बीएचयू) में हाल ही में प्रवेश लेने वाले एमबीबीएस बैच 2026 के 78 विद्यार्थियों का 15 दिवसीय फाउंडेशन कोर्स मंगलवार को संपन्न हो गया। इस दौरान कुल 50 सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 49 विषय विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा, व्यावसायिकता, नैतिकता, संवाद कौशल और व्यक्तिगत विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

समापन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समेत नई तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को आगाह किया कि एआई चिकित्सकीय निर्णयों को अधिक सटीक बनाने और रोगियों के उपचार में सहायक हो सकता है, लेकिन यह मेडिकल शिक्षा का विकल्प नहीं बन सकता।

उन्होंने विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय के बहुविषयक शैक्षणिक वातावरण का लाभ उठाने और अपनी प्रतिभा, रुचि तथा क्षमता को पहचानने की अपील की। साथ ही मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने तथा किसी भी चुनौती की स्थिति में मित्रों, परिवार और शिक्षकों से संवाद बनाए रखने की सलाह दी।

प्रश्न पूछने में संकोच न करें

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के कार्यक्रम के तहत आयोजित फाउंडेशन कोर्स में आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने विद्यार्थियों से जिज्ञासु बने रहने और प्रश्न पूछने में संकोच नहीं करने को कहा। उन्होंने कहा कि छात्रों को मार्गदर्शन लेने में झिझक नहीं होनी चाहिए और भाषा को लेकर भी आत्मविश्वास बनाए रखना चाहिए।

परीक्षा के दबाव से बचने की सलाह

डीन रिसर्च प्रो. मनोज पांडेय ने कहा कि विद्यार्थियों को पढ़ाई और परीक्षा के दबाव के बीच अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों में भागीदारी भी जरूरी है, क्योंकि स्वस्थ मन ही एक बेहतर डॉक्टर के निर्माण में मदद करता है।

उन्होंने छात्रों को आश्वस्त किया कि व्यक्तिगत जीवन या पढ़ाई से जुड़ी किसी भी समस्या की स्थिति में वे शिक्षकों और संस्थान के अधिकारियों से सहयोग ले सकते हैं।

संवाद आधारित रहे फाउंडेशन कोर्स के सत्र

संकाय प्रमुख प्रो. संजय गुप्ता ने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और भविष्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। कोर्स की समन्वयक प्रो. तुहिना बनर्जी ने बताया कि सत्रों को केवल व्याख्यान आधारित रखने के बजाय संवादात्मक शैली में आयोजित किया गया।

फाउंडेशन कोर्स के दौरान विद्यार्थियों को शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों से संवाद करने, अपनी जिज्ञासाओं और समस्याओं का समाधान पाने के साथ ही संस्थान के शैक्षणिक और व्यावसायिक वातावरण को समझने का अवसर मिला।

कोर्स के अंत में विद्यार्थियों से गूगल फॉर्म के जरिए प्रतिक्रिया भी ली गई। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों को कुलपति और अन्य अतिथियों ने प्रमाण-पत्र प्रदान किए। सह-समन्वयक डॉ. उमेश चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।