काशी विद्यापीठ में रूसी भाषा की क्लास बनी खास, कविता से लेकर व्याकरण और उच्चारण तक विद्यार्थियों ने सीखी बारीकियां
Varanasi : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के अंग्रेजी एवं अन्य विदेशी भाषा विभाग और रूस के कोज्मा मीनिन स्टेट पेडागॉजिकल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रूसी भाषा एवं संस्कृति आधारित शैक्षणिक कार्यक्रम के सातवें दिन गुरुवार को विद्यार्थियों को रूसी भाषा के व्याकरणिक विश्लेषण, शब्दावली निर्माण और भाषाई दक्षता से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के विभिन्न सत्र रूसी भाषा की प्रो. नतालिया और डॉ. दारिया के मार्गदर्शन में आयोजित किए गए। इस दौरान विद्यार्थियों ने रूसी भाषा के साहित्यिक सौंदर्य के साथ-साथ उसके व्यावहारिक और व्याकरणिक पक्षों को भी समझा।
कविता के जरिए समझाया रूसी भाषा का भाव-सौंदर्य
प्रो. नतालिया ने एडवांस डिप्लोमा और डिप्लोमा के विद्यार्थियों को प्रसिद्ध रूसी कवि अफनासी फेत की कालजयी कविता “मैं एक संदेश लेकर आया हूँ...” के माध्यम से रूसी भाषा के भाव-सौंदर्य से परिचित कराया।
इसके बाद कविता में प्रयुक्त संज्ञा, विशेषण और क्रिया पदों को अलग-अलग पहचानने का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। विद्यार्थियों ने रूसी भाषा में शब्दों के लिंग, वचन, सजीव-निर्जीव श्रेणी, व्यक्तिवाचक एवं जातिवाचक संज्ञाओं के साथ विभिन्न विभक्तियों और प्रत्ययों के प्रयोग को भी समझा।
शुरुआती विद्यार्थियों के लिए शब्दावली निर्माण पर जोर
वहीं, डॉ. दारिया ने आरंभिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए शब्दावली निर्माण पर केंद्रित विशेष सत्र आयोजित किया। उन्होंने दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं और खाद्य पदार्थों, जैसे ब्रेड, अन्न, फल और वनस्पतियों के रूसी नामों का शुद्ध उच्चारण एवं लेखन सिखाया।
विद्यार्थियों की भाषाई समझ को आसान और प्रभावी बनाने के लिए शैक्षणिक एनीमेशन और कार्टून का भी प्रयोग किया गया। इस आधुनिक शिक्षण पद्धति के माध्यम से विद्यार्थियों ने रूसी भाषा की ध्वनियों और उच्चारण को सहज तरीके से समझने का प्रयास किया।
रूसी भाषा सीखने की प्रभावी रणनीति बताई
एडवांस डिप्लोमा के विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान डॉ. दारिया ने रूसी भाषा में जल्द प्रवीणता हासिल करने की प्रभावी कार्यप्रणाली भी साझा की। उन्होंने बताया कि व्याकरणिक नियमों और विभक्तियों पर पकड़ बनाने के बाद विद्यार्थियों को रूसी चलचित्रों, संगीत, साहित्य और नियमित लेखन को अपनी सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को भाषा सीखने के साथ-साथ रूसी संस्कृति और साहित्य से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया गया।