काशी की दिव्य आरती से हरिद्वार की पावन डुबकी तक, Ganga Dussehra पर स्वर्ग जैसे दिखते हैं ये 5 घाट
नई दिल्ली। भारत में नदियों को सिर्फ जलधारा नहीं, बल्कि जीवन और आस्था का प्रतीक माना जाता है। इनमें मां गंगा का स्थान सबसे ऊंचा है। हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला गंगा दशहरा इस वर्ष 25 मई को पड़ रहा है। मान्यता है कि इसी दिन राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं।
गंगा दशहरा के मौके पर हरिद्वार से लेकर काशी, ऋषिकेश, प्रयागराज और गढ़मुक्तेश्वर तक के घाट श्रद्धालुओं की आस्था और दीपों की रोशनी से जगमगा उठते हैं। इन घाटों की सुंदरता ऐसी प्रतीत होती है मानो धरती पर स्वर्ग उतर आया हो।
हर की पैड़ी पर उमड़ता आस्था का सैलाब
धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा दशहरा के दिन सुबह से ही हर की पैड़ी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। देशभर से लोग मां गंगा में डुबकी लगाने पहुंचते हैं। घाटों पर गूंजते ‘हर-हर गंगे’ के जयकारे, मंदिरों की घंटियां और गंगा की कल-कल ध्वनि वातावरण को भक्तिमय बना देती है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन गंगा स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और मन को अद्भुत शांति मिलती है।
काशी के दशाश्वमेध घाट की भव्य गंगा आरती
भगवान शिव की नगरी काशी का दशाश्वमेध घाट गंगा दशहरा की शाम सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बन जाता है। यहां होने वाली भव्य गंगा आरती का दृश्य श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देता है। एक साथ कई पुजारियों द्वारा विशाल दीपों से की जाने वाली आरती, शंखनाद, डमरू की ताल और धूप की सुगंध माहौल को अलौकिक बना देती है।
शाम ढलते ही जब श्रद्धालु गंगा में दीपदान करते हैं, तो नदी में तैरते हजारों दीप ऐसे दिखाई देते हैं जैसे आसमान के तारे पानी में उतर आए हों।
ऋषिकेश का त्रिवेणी घाट देता है सुकून
अगर कोई श्रद्धालु भीड़-भाड़ से दूर शांत वातावरण में गंगा दशहरा मनाना चाहता है, तो ऋषिकेश का त्रिवेणी घाट बेहतरीन स्थान माना जाता है। पहाड़ों के बीच बहती गंगा, ठंडी हवाएं और शाम की महाआरती यहां आने वालों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराती है। यहां घंटों बैठकर गंगा की लहरों को निहारना अपने आप में खास अनुभव होता है।
संगम घाट पर पुण्य स्नान का महत्व
प्रयागराज का संगम घाट, जहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम होता है, गंगा दशहरा के दिन विशेष रूप से श्रद्धालुओं से भर जाता है। श्रद्धालु नाव के जरिए संगम के बीच पहुंचकर पवित्र स्नान करते हैं। इस दिन पूरा क्षेत्र रोशनी, भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगा नजर आता है।
गढ़मुक्तेश्वर का बृजघाट भी आकर्षण का केंद्र
दिल्ली-एनसीआर के लोगों के बीच गढ़मुक्तेश्वर का बृजघाट गंगा दशहरा के लिए काफी लोकप्रिय है। त्योहार के दौरान यहां मेले जैसा माहौल दिखाई देता है। घाटों को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जाता है। शाम की आरती और दीपदान के समय यहां का दृश्य बेहद मनमोहक हो जाता है।
दीपदान से सजती मां गंगा की गोद
गंगा दशहरा की शाम दीपदान का दृश्य सबसे अधिक भावुक और आकर्षक माना जाता है। श्रद्धालु पत्तों पर फूल और छोटे-छोटे दीप रखकर गंगा में प्रवाहित करते हैं। अंधेरे में बहते इन दीपों की चमक ऐसा एहसास कराती है मानो आसमान के अनगिनत तारे मां गंगा की गोद में उतर आए हों।