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बोरिंग टेक्नीशियन भर्ती परीक्षा में नकल कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़, UP STF ने वाराणसी-प्रयागराज से 13 को दबोचा

 

वाराणसी में लघु सिंचाई विभाग के सहायक बोरिंग टेक्नीशियन भर्ती परीक्षा के दौरान हाईटेक नकल गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की ओर से आयोजित परीक्षा में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए नकल कर रहे दो अभ्यर्थियों को पकड़ा गया। मामले की जांच के दौरान यूपी एसटीएफ ने प्रयागराज से गिरोह के सरगना समेत कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया। वाराणसी और प्रयागराज से कुल 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है।

पहले से थी एसटीएफ की निगरानी

एसटीएफ निरीक्षक अनिल कुमार सिंह के मुताबिक, परीक्षा के दौरान एसटीएफ की वाराणसी इकाई सक्रिय थी। इसी बीच सूचना मिली कि प्रयागराज में एक संगठित गिरोह माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल कराने का काम कर रहा है। सूचना के आधार पर एसटीएफ ने प्रयागराज में छापेमारी की, जहां गिरोह का सरगना शिवजीत पटेल, उसका भाई कप्तान सिंह पटेल और कई सॉल्वर मौजूद मिले। सभी को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।

वाराणसी के दो परीक्षा केंद्रों से पकड़े गए अभ्यर्थी

एसटीएफ की निशानदेही पर वाराणसी के मैदागिन स्थित हरिश्चंद्र बालिका इंटर कॉलेज और लल्लापुरा स्थित एंग्लो मुस्लिम स्कूल परीक्षा केंद्र से दो अभ्यर्थियों को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के साथ गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि दोनों परीक्षार्थियों को बाहर बैठे सॉल्वर माइक्रो डिवाइस के जरिए प्रश्नों के उत्तर बता रहे थे।

एक अभ्यर्थी से लिए जाते थे 5 लाख रुपये

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गिरोह प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से 5-5 लाख रुपये वसूलता था। गिरोह के सदस्य परिचितों और रिश्तेदारों के माध्यम से अभ्यर्थियों से संपर्क करते थे और उन्हें सॉल्वर की मदद से परीक्षा पास कराने का भरोसा देते थे।

वाराणसी और प्रयागराज में दर्ज हुआ मुकदमा

इस मामले में वाराणसी के कोतवाली और सिगरा थाने में सभी 13 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। एसटीएफ अब गिरोह के अन्य सदस्यों, वित्तीय लेन-देन और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच कर रही है।